अनुदान गौ शालाओं में, गौ वंश सड़क पर
हादसों का बढ़ा खतरा, कई गौवंश की चली जाती है जान
बरसाती सीजन शुरू होने के साथ ही नगर निगम ने कुछ दिन से घेरा डालकर मवेशियों को पकड़ना बंद कर दिया है।
कोटा। सरकार से प्रतिवर्ष लाखों रुपए का अनुदान गौशालाओं के नाम उठाया जा रहा है। लेकिन गायों की देखभाल के नाम पर कुछ नहीं हो रहा। बरसात के सीजन में तो गायों की हालत ही खराब है। इन्हें सड़क पर छोड़ दिए जाने से यह आए दिन दुर्घटना की शिकार हो रही हैं। बरसाती सीजन शुरू होने के साथ ही नगर निगम ने कुछ दिन से घेरा डालकर मवेशियों को पकड़ना बंद कर दिया है।
दूधिया पशुओं से ही सरोकार
शहर में संचालित अन्य गौशालाओं को दूधिया पशुओं से ही सरोकार है। ऐसे में शहर में सड़कों पर एक बार फिर से मवेशियों के झुंड नजर आने लगे हैं। दिन और रात दोनों समय में शहर के मुख्य मार्गों से लेकर गलियों तक में से मवेशियों को घेरा डालकर पकड़ना शुरू कर दिया था। दिन में कई-कई वाहन भरकर गौशाला में मवेशी पहुंचाए जा रहे थे। जिससे गौशाला में उन्हें रखने की जगह की कम पड़ने लगी थी। लेकिन जैसे ही बरसात का सीजन शुरू हुआ वैसे ही नगर निगम कोटा उत्तर व दक्षिण में घेरा डालकर मवेशियों को पकड़ना बंद कर दिया है। यह स्थिति करीब एक सप्ताह से बनी हुई है।
जिले में पन्द्रह गौशालाएं
कोटा शहर में नगर निगम की बंधा धर्मपुरा गौशाला के अलावा दादाबाड़ी व कई इलाकों समत 15 निजी गौशालाएं भी संचालित हो रही हैं। लेकिन हालत यह है कि सभी गौशालाओं में अधिकतर दुधारू पशु ही हैं। निगम की गौशाला में जहां दृूधियां पशु गिनती के हैं वहीं जबकि निजी गौशालाओं में अधिकतर दूध देने वाले ही पशु हैं। निजी गौशालाएं सरकार से अनुदान प्राप्त कर रही हैं लेकिन लावारिस को लेने से बचते हैं।
निगम की जिम्मेदारी, सड़कों से पकड़े पशु
डीसीएम निवासी राजेश शर्मा का कहना है कि शहर को कैटल फ्री बनाने के लिए जिस तरह से अभियान चलाकर पशु पकड़े थे। उससे उनकी संख्या कम दिखने लगी थी। लोगों को हादसों से बचाने के लिए बरसात में भी इन्हें निगम पकड़े। जिससे हादसों का खतरा नहीं हो। कंसुआ निवासी संजय यादव का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र में पशुओं का जमावड़ा अधिक रहता है। यहां भारी वाहन भी निकलते हैं। क्षेत्र की आबादी बढ़ने से लोगों का आवागमन भी बढ़ा है। ऐसे में निगम को चाहिए कि वह बरसात में भी पशुओं को पकड़े।
सड़कों से लगातार मवेशियों को पकड़कर गौशाला में बंद किया गया। पिछले कुछ दिन से घेरा डालकर पकड़ना बंद किया हुआ है। सिर्फ शिकायत पर सांड और बीमार व घायल पशुओं को ही एम्बूलेंस से पकड़ रहे हैं। शीघ्र ही फिर से घेरा डालकर पशुओं को पकड़ना शुरू किया जाएगा। जिससे लोगों को परेशानी नहीं होगी।
- दिनेश शर्मा, गौशाला प्रभारी नगर निगम कोटा दक्षिण

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