असर खबर का - नवज्योति इम्पेक्ट : राजस्थान में पहली बार अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क को मिली स्पोंसरशिप, कैपटिव एनिमल स्पोंसरशिप स्कीम में कोटा को मिली सफलता
एनटीपीसी ने टाइगर से हायना तक 12 वन्यजीवों को 17 लाख में लिया गोद
दैनिक नवज्योति ने इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित कर वन विभाग को ध्यान इस ओर आकर्षित किया।
कोटा। अभेड़ा बायोलॉजिलक पार्क के लिए रविवार का दिन खुशियों की सौगात लेकर आया। राजस्थान में पहली बार किसी औद्योगिक संस्थान ने 5 प्रजातियों के एक दर्जन वन्यजीवों की सम्पूर्ण पालन-पोषण की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई है। वन्यजीव संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक पहल करते हुए एनटीपीसी ने टाइगर, लैपर्ड व हायना सहित 12 वन्यजीवों को 17 लाख रुपए में गौद लिया है। जिनके भोजन, दवाइयां, वैक्सीनेशन व एनक्लोजर मेंटिनेंस सहित देखभाल का सम्पूर्ण खर्चा उठाएगी। औद्योगिक संस्थान ने यह पहल वन विभाग की कैपटिव एनिमल स्पोंसरशिप स्कीम के तहत की है। इस स्कीम को यह अब तक की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है। इस कदम से न केवल वन्यजीवों को बेहतर सुविधा मिलेगी, बल्कि पार्क के रखरखाव और वन्यजीव संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
इन शाकाहारी व मांसाहारी वन्यजीवों को लिया गोद
वन्यजीव विभाग के डीएफओ अनुराग भटनागर ने बताया कि एनटीपीसी औद्योगिक संस्थान ने अभेड़ा बायोलॉजिलक पार्क के 5 प्रजातियों के 12 वन्यजीवों को गोद लिया है। जिसमें 1 टाइग्रेस, 4 लेपर्ड, 3 हायना, 1 चिंकारा और 1 सांभर शामिल है। कम्पनी द्वारा इन वन्यजीवों के पालन-पोषण सहित सम्पूर्ण देखभाल के लिए 17 रुपए वन विभाग को दिए हैं। राजस्थान में पहली बार कैपटिव एनिमल स्पोंसरशिप स्कीम के तहत अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क को यह सफलता मिली है।
1500 पौधे लगाने के लिए 10.50 लाख रु.की सहमति
डीएफओ भटनागर ने बताया कि एनटीपीसी द्वारा अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में 1500 पौधे लगाने और तीन साल के मेंटिनेंस के लिए 10.50 लाख रुपए दिए जाने की सैदांतिक सहमति दी गई है। इससे पार्क में घना जंगल विकसित हो सकेगा। इससे पहले यहां 7 हजार पौधे लगाए गए थे, जो अब पेड़ में बदल गए हैं। वहीं, साढ़े तीन किमी के परिसर में हजारों की तादात में बड़े वृक्ष जड़े फैला चुके हैं। जिन पर बड़ी संख्या में देशी विदेशी परिंदों का बसेरा बसा हुआ है। वनकर्मियों के परिश्रम से यहां पर्यटकों के लिए खूबसूरत जंगल विकसित किया गया है।
वन्यजीव विभाग को आज सौंपा जाएगा 17 लाख का चैक
डीएफओ भटनागर ने बताया कि सोमवार शाम 4 बजे अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क परिसर में कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। जिसमें मुख्य अतिथि एनटीपीसी औद्योगिक संस्थान के डायरेक्टर(आॅपरेशनल) रविंद्र कुमार द्वारा वन्यजीवों के संरक्षण के लिए विभाग को 17 लाख रुपए का चैक सौंपा जाएगा। इस दौरान परिसर में पौधरोपण भी किया जाएगा।
नवज्योति के प्रयास लाए रंग, जताया आभार
अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क प्रदेश का सबसे बड़ा पार्क होने के बावजूद बजट की कमी से जूझता है। जिसकी वजह से वन्यजीवों की देखभाल में कमी महसूस होती थी। जिसे देखते हुए दैनिक नवज्योति ने इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित कर वन विभाग को ध्यान इस ओर आकर्षित किया। इसके बाद विभाग ने प्रदेशभर में कैपटिव एनिमल स्पोंसरशिप स्कीम शुरू कर वन्यजीवों को गोद दिए जाने की सकारात्मक पहल की। जिसका लगातार फॉलो-अप किया गया। नवज्योति के प्रयासों का असर इतना गहरा रहा कि प्रदेश में पहली बार किसी कॉपोर्रेट जगत ने अभेड़ा के वन्यजीवों को पालन-पोषण की जिम्मेदारी सामाजिक सरोकार में अपने कंधों पर उठा ली।
कॉपोर्रेट सेक्टर में बढ़ेगी वन्यजीवों के प्रति संरक्षण की भावना
उन्होंने बताया कि वन विभाग द्वारा कैप्टिव एनिमल स्पॉन्सरशिप स्कीम को वर्ष 2022 में शुरू किया गया था। लगातार किए जा रहे प्रचार-प्रसार के बाद पहली बार किसी बड़ी कंपनी ने इस दिशा में पहल करते हुए वन्यजीवों को गोद लेने में रुचि दिखाई। एनटीपीसी को सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत इस योजना की जानकारी दी गई थी, जिस पर कंपनी प्रशासन ने सकारात्मक कदम बढ़ाते हुए तत्काल सहमति दी। यह पहल न केवल अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क बल्कि राजस्थान के समग्र वन्यजीव संरक्षण प्रयासों के लिए एक मिसाल बनेगी। कॉपोर्रेट सेक्टर की इस भागीदारी से अन्य संस्थाओं को भी प्रेरणा मिलेगी।

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