असर खबर का... नहरों में फिर बहा पानी, सूखती फसलों को मिली संजीवनी
दायीं नहर में 525 और बायीं में 500 क्यूसेक जलप्रवाह शुरू
कोटा। बारिश की कमी और लगातार बढ़ते तापमान के कारण खेतों में नमी तेजी से कम होने लगी है। पर्याप्त बारिश नहीं होने से धान सहित अन्य खरीफ फसलों पर संकट के बादल मंडराने लगे थे। कई खेतों में फसलों की बढ़वार थम गई और पौधे मुरझाने लगे थे। ऐसे समय में सीएडी ने कोटा बैराज की दोनों नहरों में एक बार फिर जलप्रवाह शुरू कर किसानों को बड़ी राहत दी है। कोटा बैराज से वर्तमान में दायीं मुख्य नहर में 525 क्यूसेक तथा बायीं मुख्य नहर में 500 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। नहरों में पानी पहुंचने के साथ ही सिंचाई क्षेत्र के किसानों में राहत की उम्मीद जगी है। खेतों में नमी बनाए रखने के लिए यह जलप्रवाह बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बारिश की कमी से बढ़ी चिंता
इस मानसून सीजन में कई क्षेत्रों में अपेक्षित बारिश नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। धान जैसी फसलों को लगातार पर्याप्त नमी की जरूरत होती है। बारिश का अंतराल बढ़ने और तापमान में इजाफा होने से खेतों की ऊपरी सतह तेजी से सूखने लगी। इससे फसलों की बढ़वार प्रभावित होने लगी और कई जगह पौधों में मुरझाने के लक्षण दिखाई देने लगे। किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह थी कि यदि खेतों में समय पर पानी नहीं पहुंचा तो फसल की उत्पादकता पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। ऐसे में नहरों में दोबारा पानी छोड़े जाने से सिंचाई व्यवस्था को सहारा मिला है।
कुछ दिन पहले बंद कर दिया था जलप्रवाह
चंबल नदी पर बने बांधों में जलस्तर कम होने का हवाला देते हुए गत दिनों कोटा बैराज की दोनों नहरों में जलप्रवाह बंद कर दिया गया था। इसके बाद नहर कमांड क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ गई थी। बारिश नहीं होने और नहरों में पानी नहीं आने से खेतों में नमी बनाए रखना मुश्किल हो रहा था। अब परिस्थितियों को देखते हुए दोनों नहरों में फिर से पानी छोड़ा गया है। फिलहाल जवाहर सागर बांध से बिजली उत्पादन के बाद पानी छोड़ा जा रहा है। इस पानी का उपयोग आगे सिंचाई व्यवस्था में किया जा रहा है। नहरों में जलप्रवाह शुरू होने से उन किसानों को विशेष राहत मिली है, जिनकी फसलें बारिश पर निर्भर थीं और लंबे समय से खेतों में पर्याप्त नमी का इंतजार कर रही थीं।
नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला
बारिश की कमी से फसलों को हो रहे नुकसान के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में 13 सितंबर को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। इसमें बताया था कि खेतों में धान की फसल खड़ी है, लेकिन किसानों की नजर आसमान पर टिकी हुई है। जहां कुछ समय पहले तक पानी की पर्याप्त उपलब्धता के भरोसे खेतों में हरियाली नजर आ रही थी, वहीं अब सिंचाई के संकट ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। नहरों में जलप्रवाह बंद होने से सिंचाई के लिए पानी का संकट उत्पन्न हो गया है। ऐसे में धान उत्पादक किसानों को फसल बचाने के लिए नलकूप और डीजल इंजन का सहारा लेना पड़ रहा है। महंगे डीजल से पानी खींचकर खेतों तक पहुंचाने में सिंचाई की लागत लगातार बढ़ रही है। समाचार प्रकाशित होने के बाद सीएडी अधिकारियों ने जयपुर के अधिकारियों को इससे अवगत करवाया था। वहां से अनुमति मिलने के बाद दोनों नहरों में पानी छोड़ दिया गया।
बारिश की कमी को देखते हुए कोटा बैराज की दोनों नहरों में जलप्रवाह फिर से शुरू कर दिया है। वर्तमान में दायीं मुख्य नहर में 525 क्यूसेक तथा बायीं मुख्य नहर में 500 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है।
- शोभित गर्ग, प्रभारी, कोटा बैराज नियंत्रण कक्ष

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