एनएचएआई की लापरवाही से दिल्ली- मुंबई एक्सप्रेस-वे पर भ्रमित हो रहे वाहन चालक
कोटा की जगह बारां नेशनल हाईवे पर निकल रहे वाहन
कराड़िया में दो इंटरचेंज, दोनों के मोड़ पर संकेतक नहीं होने से भटक रहे वाहन चालक।
कोटा। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर एनएचएआई की लापरवाही वाहन चालकों के लिए मुसीबत बन रही है। कराड़िया क्षेत्र में बने कोटा और बारां के दो अलग-अलग इंटरचेंज के मोड़ पर संकेतक नहीं होने से वाहन चालक भ्रमित हो रहे हैं। नतीजा यह है कि कोटा आने वाले वाहन चालक अनजाने में बारां नेशनल हाइवे पर पहुंच रहे हैं, जहां से उन्हें अतिरिक्त चक्कर काटकर वापस लौटना पड़ता है। वहीं, कुछ वाहन चालकों को लंबी दूरी से बचने के लिए मजबूरी में 300 मीटर रॉन्ग साइड चलना पड़ता है। जिससे गंभीर हादसा होने का खतरा बना रहता है। यह समस्या स्टेट हाइवे 70 जालिमपुरा इंटरचेंज से कोटा आने वाले वाहन चालकों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
दोनों इंटरचेंज के घूम पर नहीं संकेतक बोर्ड
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे के कराड़िया क्षेत्र में कोटा और बारां के लिए दो अलग-अलग इंटरचेंज बनाए गए हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इन इंटरचेंज के मोड़ पर कहीं भी ऐसा संकेतक नहीं है जो यह बता सके कि कौनसा रास्ता कोटा और बारां की ओर जाता है।इधर,वाहन चालक रफीक मोहम्मद, सतीश नायक, अजय मेडतवाल का कहना है कि रात के समय स्थिति और विकट हो जाती है। अंधेरे में बिना संकेतक के सही रास्ता पहचानना मुश्किल हो जाता है।
दोनों इंटरचेंज के बीच सिर्फ 50 मीटर का फासला
जानकारी के अनुसार, बारां इंटरचेंज के बाद महज 50 मीटर आगे ही कोटा रोड का इंटरचेंज मौजूद है। यदि यहां और पहले वाले मोड़ पर स्पष्ट और बड़े संकेतक बोर्ड लगा दिए जाएं, तो न केवल वाहन चालक भ्रमित होने से बचेंगे बल्कि उन्हें 1 किलोमीटर लंबा चक्कर और रॉन्ग साइड जाने से भी बच सकेंगे। हालांकि, कोटा इंटरचेंज के मोड़ पर बिल्कुल छोटे शब्दों में लाल रंग से कोटा लिखा हुआ है, जो देखने से भी दिखाई नहीं देता। बरहाल, बारां इंटरचेंज के मोड़ पर तो संकेतक ही नहीं है।
वाहन चालकों की मांग
स्थानीय निवासी और वाहन चालकों ने एनएचएआई से मांग की है कि कराड़िया के दोनों इंटरचेंज के मोड़ पर तुरंत बड़े और रिफ्लेक्टिव संकेतक बोर्ड लगाए जाएं। वहीं, रात के समय दिखने वाले फ्लोरोसेंट साइन बोर्ड लगाए जाएं।
वाहन चालक बोले- एक्सप्रेस-वे पर बुनियादी चूक से बढ़ा खतरा
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे जैसे बड़े प्रोजेक्ट पर इस तरह की बुनियादी चूक वाहन चालकों के लिए परेशानी का सबब बन रही है। दो बार मैं खुद इस गफलत का शिकार हो चुका हूं। एनएचएआई को वाहन चालकों के हित में रिफ्लेक्टिव संकेतक बोर्ड लगवाने चाहिए।
कुछ दिनों पहले सुल्तानपुर से कोटा गया था। जालिमपुरा इंटरचेंज होते हुए कराड़िया पहुंचा। यहां दो इंटरचेंज बने हुए हैं और दोनों के मोड पर कोई सांकेतिक बोर्ड नहीं होने के कारण मैं बारां वाले इंटरचेंज की ओर मुड़ गया और टोल पार करने के बाद पता चला कि कोटा रोड की जगह बारां नेशनल हाईवे पर आ गया। ऐसे में मुझे करीब एक किलोमीटर लंबा अतिरिक्त चक्कर काटने के बाद सही रास्ते पर पहुंच सका। एनएचएआई की लापरवाही के कारण मानसिक परेशानी हुई और समय भी व्यर्थ हुआ।
यह दिखने में छोटी लेकिन गंभीर समस्या है, जब एनएचएआई टोल पूरा लेती है तो वाहन चालकों व यात्रियों की सुरक्षा से संबंधित पुख्ता इंतजाम किए जाने चाहिए। सबसे ज्यादा मुसीबत बाहर से आने वाले व पहली बार जालिमपुरा से कराड़िया एक्सप्रेसवे पर आने वाले वाहन चालकों के लिए रहती है। एनएचएआई की लापरवाही कभी बड़ा हादसे का कारण बन सकती है। ऐसे में जरूरी है कि समय पर व्यवस्थाएं दुरुस्त कर ली जाए। दिल्ली- मुंबई एक्सप्रेसवे पर सभी जगह संकेतक बोर्ड लगे हुए हैं। रही बात कराड़िया में बारां और कोटा इंटरचेंज के मोड़ पर संकेतक बोर्ड की तो दिखवाएंगे।

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