सफलता कोई इत्तेफाक नहीं, 'माइक्रो प्लानिंग' का नतीजा

टॉपर्स का 'टाइम मैनेजमेंट' फॉमूर्ला, नोट्स बनाने का अनोखा अंदाज

सफलता कोई इत्तेफाक नहीं,  'माइक्रो प्लानिंग' का नतीजा

टॉपर्स का मानना है कि 'लिखकर याद करना' और बार-बार दोहराना ही जीत की कुंजी है।

कोटा। मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है। हर साल जब बोर्ड परीक्षाओं या कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स के रिजल्ट आते हैं, तो कुछ चेहरे चमकते हुए सितारों की तरह उभरते हैं। हम उन्हें 'टॉपर्स' कहते हैं।आज दैनिक नवज्योति की खास रिपोर्ट 'टॉपर्स का मास्टरप्लान' में हम पर्दा उठाएंगे उन अनकहे राज से, जिन्हें अपनाकर साधारण छात्र भी असाधारण बन जाते हैं। हम जानेंगे उनके टाइम मैनेजमेंट का गणित और उनके नोट्स बनाने का वो अनोखा तरीका, जो उन्हें भीड़ से अलग खड़ा करता है।" टॉप करना कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक सटीक प्लानिंग का नतीजा है।

- ये रहती है टॉपर्स की योजना
अनुशासन का खेल: टॉपर्स कभी भी 'कल' पर काम नहीं टालते। उनके लिए टाइम टेबल सिर्फ कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि उनकी लाइफलाइन होती है।
स्मार्ट वर्क बनाम हार्डवर्क: वे 18 घंटे नहीं पढ़ते, बल्कि उन 6 घंटों पर ध्यान देते हैं जहाँ उनका दिमाग सबसे ज्यादा सक्रिय होता है।
रिवीजन की ताकत: एक बार पढ़ना काफी नहीं है। टॉपर्स का मानना है कि 'लिखकर याद करना' और बार-बार दोहराना ही जीत की कुंजी है।
सवालों से दोस्ती: वे केवल जवाब नहीं रटते, बल्कि 'क्यों' और 'कैसे' के पीछे भागते हैं।
डिजिटल डिटॉक्स: पढ़ाई के दौरान मोबाइल फोन और सोशल मीडिया से दूरी उनकी एकाग्रता का सबसे बड़ा हथियार है।

- राकेश केवट: "दुकान की जिम्मेदारी के साथ हिंदी में हासिल किए 96% अंक
राज. उ.मा.वि. सकतपुरा कोटा शहर के विद्यार्थी राकेश केवट की सफलता की कहानी बेहद प्रेरणादायक है। घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण राकेश आधा दिन दुकान पर काम करते थे और शेष समय पढ़ाई को देते थे। संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने बिना किसी कोचिंग के हिंदी में 96% और भूगोल में 89% अंक प्राप्त किए। समय के अभाव के कारण मैं कोचिंग नहीं कर सका। मैंने स्कूल में होने वाले हर टेस्ट को गंभीरता से दिया। जो भी समझ नहीं आता था, उसे शिक्षकों से पूछकर हल करता था।

- दुर्गेश मेहरा: "बीमारी भी नहीं रोक सकी कदम, भूगोल में पाए 94 अंक
राज. उ.मा.वि. सकतपुरा कोटा शहर के विद्यार्थी दुर्गेश मेहरा ने पूरे साल स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना किया। यहाँ तक कि परीक्षा के ठीक पहले उनकी तबीयत अत्यधिक खराब हो गई, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। दुर्गेश ने बताया, "स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद मैंने अधिक से अधिक क्लास अटेंड कीं और नियमित टेस्ट दिए। इसी मेहनत का परिणाम रहा कि मैंने भूगोल विषय में 94 अंक प्राप्त किए।"

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- छवि मित्तल: सटीक उत्तर और समय प्रबंधन पर दें ध्यान
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, दादाबाड़ी (घोड़ेवाला)छात्रा छवि मित्तल ने बताया कि मैंने कक्षा 12 वीं में 94 प्रतिशत प्राप्त कर सफलता अर्जित की। सफलता का मुख्य आधार नियमितता रही। छवि ने कहा, मैं प्रतिदिन करीब 10 घंटे तक पढ़ाई करती थी और अवकाश के दिनों में रिवीजन करती थी। स्कूल में होने वाले टेस्ट और परीक्षाओं को मैंने कभी नहीं छोड़ा, क्योंकि इससे मुझे स्वयं के मूल्यांकन में मदद मिली। परीक्षार्थियों को सलाह देते हुए छवि कहती हैं परीक्षा देते समय हमेशा ध्यान रखें कि प्रश्न में जो पूछा गया है, केवल उसका ही सटीक उत्तर लिखें और समय प्रबंधन का विशेष ध्यान रखें।

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- काजल गुर्जर: रविवार को विशेष विषयों पर फोकस और परीक्षा हॉल में एकाग्रता"
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, दादाबाड़ी (घोड़ेवाला)में 12वीं बोर्ड में 95% से अधिक अंक प्राप्त करने वाली काजल गुर्जर ने विज्ञान वर्ग में शानदार प्रदर्शन किया। काजल ने अपनी रणनीति साझा करते हुए बताया, स्कूल के बाद घर पर हर विषय को दो-दो घंटे देना मेरी दिनचर्या का हिस्सा था। उन्होंने बताया, "शिक्षकों द्वारा बताए गए महत्वपूर्ण प्रश्नों को मैंरिवाइज करती थी। परीक्षा देने के दौरान विद्यार्थियों को अपना फोकस पेपर पर ही रखना चाहिए।

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घर पर आकर दोबारा समझे स्कूल में पढ़े हुए को
राज.उमावि. दीगोद की छात्रा -अनुष्का नागर ने बताया कि स्कूल में पढ़ाई के दौरान जो पढ़ाया जाता था। वहां घर पर आकर दोबारा पढ़ाई करते थे। उसमें से कुछ समझ में नहीं आता था तो उसको टीचर से पूछते थे। सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई नियमित रूप से पढ़ाई करते थे। 12 वीं मे मेरे 90 प्रतिशत से अधिक प्रतिशत से सफलता आर्जित की।

सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई करती थी 
ज्योतिका नागर, राज.उमावि. दीगोद की छात्रा ने बताया कि सुबह जल्दी उठकर पढ़ाई करती थी और जो भी स्कूल में पढ़ाया जाता था। उसको अच्छे से समझने की कोशिश करते थे। इसी के साथ स्कूल में आयोजित होेने वाले टेस्ट भी दिए। इसी के साथ घर पर खाली समय में हर विषय का रिवीजन करती थी।

- शिक्षकों का समर्पण: रिक्त पदों के बावजूद बेहतर परिणाम
स्कूल में व्याख्याताओं के पद रिक्त होने के बावजूद विद्यालय के वरिष्ठ अध्यापकों द्वारा पूर्ण प्रयास किया जाता है कि बोर्ड परीक्षा का परिणाम श्रेष्ठ रहे। उन्होंने कहा, विगत तीन सत्रों से 12वीं बोर्ड का परिणाम उत्कृष्ट रहा है। भूगोल विषय के अध्यापन के दौरान कोशिश रही कि क्लासरूम में ही बच्चों को विषय के बारे में समझाया।समय-समय पर छात्रों की शंकाओं का समाधान किया। और उनकी 'प्रोग्रेस रिपोर्ट' से अभिभावकों को अवगत कराया । 
-शिव कुमार धामेजा,वरिष्ठ अध्यापक राज.माध्य.वि. सकतपुरा

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