सांप के जहर से ज्यादा जहरीला अंधविश्वास, झाड़ फूंक में गंवा रहे अपनों की जान

विशेषज्ञ बोले- सर्पदंश में हर मिनट अहम

सांप के जहर से ज्यादा जहरीला अंधविश्वास, झाड़ फूंक में गंवा रहे अपनों की जान
मंडाना और स्टेशन क्षेत्र में 2 मासूमों की हो चुकी मौत, परिवार बच्चों को डॉक्टर की बजाय ले गए झाड़-फूंक कराने ।

कोटा। तकनीक और विज्ञान के इस युग में भी अंधविश्वास सांप के जहर से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है। लोग अब भी झाड़फूंक पर आंख बंदकर विश्वास कर जिंदगी को मौत की ओर धकेल रहे हैं। इसका प्रत्यक्ष उदारहण मंगलवार को मंडाना क्षेत्र में देखने को मिला। यहां 13 साल की बच्ची को जहरीले सांप ने डंस लिया था, परिजन अस्पताल ले जाने के बजाए देवी-देवताओं के स्थान पर ले गए। इलाज में देरी से मासूम की हालत लगातार बिगड़ती चली गई, बाद में गंभीर अवस्था में निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अंधविश्वास का यह पहला मामला नहीं है, इससे पूर्व भी झाड़-फूंक के चक्कर में जान गंवाने के कई मामले सामने आ चुके हैं।

केस-1 : अस्पताल पहुंचने में साढ़े तीन घंटे बर्बाद
21सितम्बर 2026 : मंडाना निवासी कक्षा 6 की छात्रा अनसुईया सोमवार शाम 7 बजे करीब घर से से बाजार दीपक लेने गई थी, इसी दौरान रास्ते में जहरीले सांप ने उसे डंस लिया। परिजन उसे तुरंत अस्पताल ले जाने के बजाय देवी-देवताओं के स्थान पर लेकर गए। वहां काफी समय तक उसे रखा गया, लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। रात 10.30 बजे गंभीर अवस्था में परिजन निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, तब तक काफी देर हो चुकी थी, डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।

केस-2 : झाड़फूंक में 2 घंटे गवांए, शरीर में फैला जहर
21 जून 2026 : रेलवे कॉलोनी टापरी इलाके में सर्पदंश से 2 साल के मासूम बच्चे कालू की मौत हो गई थी। सांप के डंसने के बाद परिजन उसे अस्पताल ले जाने के बजाय दो घंटे तक झाड़-फूंक करवाते रहे, जिससे जहर पूरे शरीर में फैल गया। हालत बिगड़ने पर उसे कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान मासूम की मौत हो गई।

एक्सपर्ट्स व्यू 
विज्ञान से समझिए, झाड़ फूंक का भ्रम कैसे फैलता है?
अक्सर लोग तर्क देते हैं कि उक्त व्यक्ति तांत्रिक की झाड़-फूंक से ठीक हो गया। असल में, इसके पीछे का सच विज्ञान की रोशनी में इस तरह समझाता जा सकता है।
-बिना जहर वाले सांप : भारत में पाए जाने वाले लगभग 90% सांप जहरीले नहीं होते। यदि वे डंस लें, तो इंसान बिना किसी इलाज के भी बच जाता है। लेकिन, तांत्रिक इसका श्रेय अपनी झाड़-फूंक को दे देते हैं।
-ड्राई बाइट : कई बार जहरीले सांप (जैसे कोबरा या करैत) सिर्फ डराने के लिए काटते हैं और शरीर में जहर नहीं छोड़ते, यदि छोड़ते भी हैं तो सिर्फ लगभग 0.1 एमएल। ऐसे मामलों में भी मरीज बच जाते हैं, जिससे लोगों का अंधविश्वास और गहरा हो जाता है।
-असली खतरा: जब कोई जहरीला सांप एग्रेसिव मोड़ में होता है, तब वह पूरी ताकत से बाइट करता है। ऐसी स्थिति में वह औसतन 1 से 3 एमएल तक जहर छोड़ देता है, तब झाड़-फूंक में गंवाया गया एक-एक मिनट मरीज को मौत के करीब ले जाता है।
-8 से 10 एमएल जहर बनाने में लगते तीन माह : जहरीले सांप में औसतन 8 से 10 एमएल वेनम होता है। जिसे बनाने में उसे करीब 3 माह का समय लगता है। इसका उपयोग वह भोजन के लिए शिकार करने में उपयोग करता है। वह चूहे का शिकार करने के लिए भी 0.1 एमएल ही जहर छोड़ता है, जिससे चूहा बेहोशी की स्थिति में आ जाता है और वह उसे निगल जाता है। सांप को यह सेंस होता है कि उसके पास कितना वेनम स्टोक है और कितनी मात्रा में उसका उपयोग करना है।
- अनुराग भटनागर, डीएफओ वन्यजीव-उदयपुर

Read More  गणेश महोत्सव : रोज 10 लाख के केले और 50 हजार के फूल बिक रहे

सर्प दंश पर इन बातों का रखें ध्यान
मेडिकल कॉलेज अस्पताल के सीनियर फिजिशियन डॉ. पंकज कुमार जैन ने सर्पदंश पर बरती जाने वाली सावधानियोें के बारे में बताया, जो इस प्रकार है।
-सर्प दंश के मरीज को जितना जल्दी हो सके, अस्पताल ले जाएं ताकि सांप के जहर का शरीर के अंगों पर प्रभाव न पड़े।
-सभी तरह के सांपों के लिए दवा ( एंटी स्नैक विनम) एक ही होती है, जिसे जितना जल्दी लगा सके उतना ही अधिक जान बचने के चांस होते हैं।
-झाड़-फूंक में समय न गंवाएं: ओझा, तांत्रिक या झाड़-फूंक के चक्कर में बिल्कुल न पड़ें, समय बर्बाद होने से मरीज की जान जा सकती है।

Read More अभेड़ा बॉयोलॉजिकल पार्क में दैनिक नवज्योति ने किया पौधारोपण

प्राथमिक उपचार
तंग चीजें हटाएं: सर्प दंश के बाद सूजन आने से पहले पीड़ित की अंगूठी, घड़ी, कंगन या तंग कपड़े तुरंत उतार दें।
चीरा न लगाएं: काटे गए स्थान पर ब्लेड या चाकू से चीरा लगाने की कोशिश बिल्कुल न करें।
जहर न चूसें: मुंह से जहर चूसने का प्रयास न करें, इससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
कसकर पट्टी न बांधें: खून के बहाव को पूरी तरह रोकने के लिए बहुत ज्यादा कसकर कोई चीज न बांधें।
बर्फ न लगाएं: घाव पर बर्फ या ठंडा पानी न लगाएं।

Read More सीबीएन ने 156.650 किलो डोडा चूरा और कार जब्त की, जानें पूरा मामला

अंधविश्वास डिग्री के साथ चलता रहेगा
आधुनिक जीवन ने डर और अनिश्चिता बढ़ा दी है। जब भय का मनोविज्ञान बढ़ने लगता है तब तर्क करने और निर्णय लेने की क्षमता कम होने लगती है। ऐसे में मनुष्य शॉर्टकट ढूंढता है और तांत्रिकों का ग्राहक बनता है। जबकि, शिक्षा की मुख्य भूमिका, लोगो में आलोचनात्मक चेतना और वैज्ञानिक दृष्टिकोण उत्पन्न करना है। जिसके कारण ही सवाल पूछने की हिम्मत करते हैं, जब तक ऐसी शिक्षा नहीं होगी तब तक अंधविश्वास डिग्री के साथ-साथ चलता रहेगा।
-ज्योति सिडाना, समाजशास्त्री जेडीबी आर्ट्स कॉलेज

Related Posts

Post Comment

Comment List

Latest News

मोती डूंगरी गणेश मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, दर्शन के लिए किए गए विशेष सुरक्षा इंतजाम मोती डूंगरी गणेश मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, दर्शन के लिए किए गए विशेष सुरक्षा इंतजाम
मोती डूंगरी गणेश मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह से ही भक्तों ने भगवान गणेश के दर्शन व...
रोड रेज मामले में चार आरोपी गिरफ्तार : नकली पिस्टल और कार बरामद, जानें पूरा मामला  
फॉरेस्ट रेंजर की मौत का मामला : सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब, कार्रवाई की रिपोर्ट भी दें
जयपुर बुकमार्क 2027 में गुजराती साहित्य पर रहेगा विशेष फोकस, भारत-यूके पब्लिशिंग फेलोशिप की निरंतरता के साथ प्रकाशन
गलतागेट पुलिस की वाहन चोरों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई : 17 मोटरसाइकिल बरामद, जानें पूरा मामला
भारत-फ्रांस-यूएई की त्रिपक्षीय बैठक में पश्चिम एशिया पर चर्चा, अंतरिक्ष और एआई समेत सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति
रिश्तेदारी : पहले सास अब बहू और पहले भाभी अब ननद बनी पार्षद