अव्यवस्था के चक्कों पर चढ़ी कोटा की सिटी बसें
ना फर्स्ट एड किट बॉक्स ना फायर एक्सटिंग्विशर
कोटा। शहर में कोटा बस सर्विस लिमिटेड द्वारा संचालित सिटी बसें शहरवासियों के लिए आवागमन का एक किफायती साधन है जिससे हजारों लोग रोज सफर करते हैं। इसके अलावा कई कोशिशों और मुश्किलों के बाद ये सिटी बसें शहर में संचालित हो पाई थी। इन बसों का संचालन तो कर लिया गया लेकिन बसों की हालत में कोई सुधार नहीं किया गया। आज भी शहर में संचालित इन सिटी बसों में से कई बसों की हालत खराब हुई पड़ी है।
एलईडी सालों से बंद
शहर में करीब 10 रूटों पर ये सिटी बसें संचालित हैं, इन सभी रूटों पर चलने वाली बसों के विंडशिल्ड पर लगी एलईडी में रूट की जानकारी प्रदर्शित होना तय था, जो शुरूआती संचालन में तो हुआ लेकिन उसके बाद बंद हो गया और अभी तक बंद ही है। एलईडी के खराब होने पर बसों की विंडशिल्ड पर रूट की जानकारी भी चस्पा नहीं है। एलईडी बंद होने और जानकारी चस्पा नहीं होने से यात्रियों को बसों के रूट के बारे में पता नहीं चलता और वे बहुत बार गलत बस में चढ़ जाते हैं।
फ्लोर उखड़ा, सीटें टूटी
बसों की हालत यहां तक खराब है कि उनका नीचे का फ्लोर तक उखड़ गया है। जो यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। जरा सी चूक से गम्भीर चोट लग सकती है। नयागांव दौलतगंज रूट पर चलने वाली बसों के फ्लोर इस तरह से उखड़े हैं कि ध्यान से चलने के बावजूद कोई भी आसानी से चोटिल हो सकता है। वहीं बात करें सीटों की स्थिति की तो इनमें से कई बसों की सीटें भी टूटी पड़ी हैं, जो सवारियों को बैठने में भी परेशानी खड़ी करती है।
आपातकालीन स्थितियों के लिए नहीं उपकरण
मोटर वाहन अधिनियम के मुताबिक हर यात्री वाहन में फर्स्ट एड किट बॉक्स और फायर एक्सटिंग्विशर होना आवश्यक है ताकि आपातकालीन या दूर्घटना की स्थिति में घायलों को प्राथमिक उपचार किया जा सके या ऐसी स्थिति को संभाला जा सके। लेकिन कोटा में संचालित इन बसों में फर्स्ट एड किट बॉक्स तो मिले लेकिन उनमें रहने वाली दवाईयां मौजूद ही नहीं थी और जो थी वो कभी बदली ही नहीं गई। इसके अलावा बसों में उपस्थित फायर एक्सटिंग्विशर की एक्सपायरी डेट खत्म हो चुकी है दूसरी ओर इनके बक्सों पर जंग तक लग चुका है।
दरवाजे रस्सियों से बंधे, हैण्डलबार टूटे
इन बसों के आॅटोमैटिक बंद होने वाले दरवाजे रस्सियों से बंधे मिले ड्राइवर से इसके बारे में पूछा तो बताया कि दरवाजे ठीक कराने के लिए संचालन कम्पनी को बोला हुआ अब कब होंगे ये पता नहीं। वहीं दूसरी ओर बसों में खड़े रहने वाले यात्रियों के लगे हैण्डलबार भी मौजूद नहीं है। जबकी इन बसों में शुराआती दौर में ये सब सुविधाएं उपलब्ध थी निगम की ओर से निगरानी की कमी और कम्पनी की लापरवाही के कारण ये बसें खस्ताल में पहुंच चुकी हैं, जिनमें चारों और कमियां ही कमियां नजर आ रही हैं।
सिटी बसों में रोज आना जाना होता है अभी सर्दी के मौसम में बस में जाते हैं तो गेट खुले होने से ठंड का सामना करना पड़ता है। हैण्डलबार टूटे होने से कई बार खड़े होकर सफर करने में परेशानी होती है।
- राकेश जादम, संजय नगर
बसें चली थी तब खुशी हुई थी की अब हमारे कोटा में भी सिटी बसें चलेगी लेकिन धीरे धीरे ये भी लापरवाही और रखरखाव में कमी बरतने के चलते कंडम हो रही है।
- सौहेल कुरैशी, गोविंद नगर
मैं रोज एरोड्राम से रानपुर तक कॉलेज जाने के लिए सिटी बस का उपयोग करती हूं शुरूआत में ये बसें एक दम ठीक थी लेकिन अब सीटों से लेकर गेट सब खराब हो रहे हैं इन बसों की ठीक से मरम्मत भी नहीं की जा रही है।
- कृतिका शर्मा, छावनी
बसों को नियमित रूप से संचालित किया जा रहा है, बसों से जुड़ी समस्या में जो कमी है उसे अभियान चलाकर ठीक करवाया जाएगा। अगर कहीं पर खमी है तो संचालक कम्पनी को नोटिस देकर कारवाई जुर्माना वसूला जाएगा।
- अजय कुमार बब्बर, सहायक अभियंता, गैराज नगर निगम

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