हैंगिंग ब्रिज पर जानलेवा गड्ढ़ों की भरमार, सिर्फ टोल वसूली पर ध्यान, खतरे में यात्रियो की जान

ब्रिज की दोनों लेन पर गहरे गड्ढ़े, दुर्घटना का खतरा

हैंगिंग ब्रिज पर जानलेवा गड्ढ़ों की भरमार, सिर्फ टोल वसूली पर ध्यान, खतरे में यात्रियो की जान

निजी फर्म को हाइवे लीज पर देकर भूली एनएचएआई।

कोटा। एनएचएआई की लापरवाही से  हजारों यात्रियों की जान खतरे की जद में आ गई। चंबल हैंगिंग ब्रिज पर टोल चुकाने के बाद भी हजारों यात्री जोखिमभरा सफर करने को मजबूर हैं। हैंगिंग  ब्रिज पर जगह-जगह जानलेवा गड्ढ़े हो रहे हैं। जिसकी मरम्मत करवाने के बजाए सिर्फ टोल वसूली पर ध्यान दिया जा रहा है और वाहन चालकों की सुरक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है। जबकि, प्रतिदिन ब्रिज से  करीब 10 हजार वाहन गुजरते हैं। इसके बावजूद एनएचएआई जिनसे टोल वसूल रही है, उन्हीं की जान खतरे में डाल रही है। दरअसल, नेशनल हाइवे आॅथोरिटी आॅफ इंडिया ने मोनेटाइजेशन स्कीम के तहत चंबल हैंगिंग ब्रिज को  निजी फर्म आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड को 20 साल के लिए लीज पर दिया है। इसके 10 माह  बाद भी क्षतिग्रस्त हाइवे की मरम्मत नहीं करवाई गई।  जिसकी वजह से कोटा से जयपुर व जयपुर से कोटा आने वाले वाहन चालकों के दुघर्टनाग्रस्त होने का खतरा मंडरा रहा है। 

न एनएचएआई को परवाह न ही निजी फर्म को 
चंबल हैंगिंग ब्रिज हाड़ौती का सबसे ज्यादा टोल रेवन्यू जनरेट करने वाला ब्रिज है। प्रतिदिन यहां से 10 हजार से ज्यादा वाहनों का आवागमन रहता है। जिनसे लाखों रुपए का राजस्व प्राप्त होता है। इसके बावजूद क्षतिग्रस्त हाइवे की मरम्मत करवाने में न एनएचएआई को परवाह और न ही निजी फर्म को। नतीजन, वाहनों का संतुलन बिगड़ रहा है और हादसे का खतरा बढ़ रहा है। 

हाइवे की दोनों लेन हो रही छलनी
हैंगिंग ब्रिज की दोनों सड़कों पर गहरे गड्ढ़े हो रहे हैं। कोटा से जयपुर जाने वाली लेन हो या जयपुर-बूंदी से कोटा आने वाली लेन। दोनों ही जगह सड़क छलनी हो रही है। स्पीड से दौड़ते वाहनों का गड्ढ़ों के कारण बैलेंस बिगड़ जाता है। 

500 करोड़ में 20 साल के लिए दिया लीज पर
एनएचएआई ने चंबल हैंगिंग ब्रिज को 500 करोड़  रुपए में निजी फर्म को 20 साल के लिए लीज पर दिया है। 1 अप्रेल 2024 को हैंगिंग ब्रिज निजी कम्पनी को हैंडओवर कर दिया गया था। तब से अब तक 10 माह पूरे हो चुके हैं। फिर भी मरम्मत नहीं करवाई। 

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हैंगिंग ब्रिज गिरने से 48 लोगों की हो चुकी मौत
चंबल हैंगिंग ब्रिज का निर्माण कार्य वर्ष 2007 में शुरू हुआ था। चंबल नदी पर ब्रिज की लंबाई करीब 1.4 किमी है। 24 दिसम्बर 2009 को निर्माण के दौरान हैंगिंग ब्रिज टूट कर चंबल में गिर गया था। जिसमें 48 लोगों की मौत हो गई थी और 17 लोग घायल हो गए थे। ऐसा हादसा दोबारा न हो जाए, इसके लिए जरूरी है कि हाइवे की मरम्मत करवाई जानी चाहिए। 

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चंबल से 400 फीट ऊंचा ब्रिज, हर पल जान का खतरा
हैंगिंग ब्रिज चंबल नदी से 400 फीट ऊंचाई पर है। जहां से प्रतिदिन 24 घंटे भारी वाहनों का आवागमन रहता है। हालात यह है, वाहनों के गुजरने के दौरान ब्रिज कम्पन्न करता है। गड्ढ़ों के कारण भारी वाहनों का दबाव सड़क पर ज्यादा पड़ता है, इससे सड़क के टूटने से वाहन चालकों का चंबल नदी में गिरने का डर बना रहता है।  हैंगिंग ब्रिज का निर्माण साल 2017 में पूरा हुआ था और इसी साल से इस पर टोल वसूली भी शुरू हो गई थी।

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क्या कहते हैं वाहन चालक
वाहन चालकों की जान से खिलवाड़ कर रहा एनएचएआई
झालावाड़ से हमारे रिश्तेदार कोटा आए थे। उनके साथ मंगलवार को बूंदी गया था। हैंगिंग ब्रिज टोल प्लाजा से निकलते ही गड्ढ़ों का सिलसिला शुरू हो गया, जो करीब 500 मीटर तक जारी रहा। इस बीच कार का बैलेंस भी बिगड़ा। जिसकी वजह से कार डिवाइडर से टकराने से बाल-बाल बची। एनएचएआई  अधिकारियों की घोर लापरवाही से वाहन चालकों की जान खतरे में बनी रहती है। 
- रोहिताश मीणा, अनुदेश मीणा, झालावाड़ निवासी

2009 की घटना से लें सबक
करीब 4 महीने से हैंगिंग ब्रिज पर गड्ढ़े हो रहे हैं। एनएचएआई के अधिकारी व टोल कम्पनी के प्रतिनिधियों का भी आए दिन यहां से गुजरना होता है। इसके बावजूद उन्हें जानलेवा गड््ढ़े दिखाई नहीं देते। एनएचएआई व निजी कम्पनी को सिर्फ टोल वसूली से मतलब है ।  
- शैलेंद्र हाड़ा, धीरेंद्र सिंह, बारां निवासी 

सड़क मरम्मत का काम शुरू करवा दिया है। थोड़ा समय लगेगा लेकिन जल्द ही सड़क का निर्माण हो जाएगा।
- संदीप अग्रवाल, प्रोजेक्ट मैनेजर एनएचएआई कोटा

सड़क मरम्मत का काम शुरू करवा दिया है। थोड़ा समय लगेगा लेकिन जल्द ही सड़क का निर्माण हो जाएगा।
- संदीप अग्रवाल, प्रोजेक्ट मैनेजर एनएचएआई कोटा

चंबल हैंगिंग ब्रिज पर सड़क निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। दो-तीन माह में 28 किमी हाइवे की पूरी सड़क नई बनवा दी जाएगी। हमारी कम्पनी ने अब तक नयागांव से झालावाड़ वाले हाइवे पर नया रोड  बनाया है। साइन बोर्ड भी लगवाए हैं। यात्रियों की सुविधाओं का ध्यान रखा जा रहा है। 
- राजेश लोनकर, डीजीएम आईआरबी इंफ्रास्ट्रेक्चर प्राइवेट लिमिटेड

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