Voice of gen-z & alpha: नौकरी की राह में फीस की दीवार, बेरोजगारों से हर कदम पर वसूली!
युवाओं का सवाल—नौकरी की गारंटी नहीं तो परीक्षा शुल्क क्यों?
कोटा। सरकारी नौकरी की तैयारी युवाओं के लिए अवसर से ज्यादा खर्च का बोझ बनती जा रही है। आवेदन से लेकर पात्रता परीक्षा तक अलग-अलग शुल्क और दस्तावेज बनवाने के खर्च से बेरोजगार युवाओं की जेब पर लगातार भार बढ़ रहा है। परीक्षा शुल्क के नाम पर 300 से 800 रुपए तक खर्च, फार्म भरने और ई-मित्र से दस्तावेज बनवाने का अलग भुगतान देना पड़ता है। परीक्षा केन्द्र दूसरे जिले में होने पर आने-जाने का खर्च—नौकरी मिलेगी या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं, लेकिन तैयारी और परीक्षा के नाम पर खर्च तय है। दैनिक नवज्योति के ह्यवॉइस ऑफ जेन जी एंड अल्फाह्ण अभियान के तहत युवाओं ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार ने सरकारी नौकरी की भर्ती प्रक्रिया को धंधा बना दिया है। युवाओं का कहना है कि बेरोजगारों से बार-बार शुल्क वसूलने के बजाय सरकार को भर्ती प्रक्रिया को अधिक सुलभ और आर्थिक रूप से राहत देने वाला बनाना चाहिए।
गरीब छात्र उधार लेकर परीक्षा देते हैं
पात्रता परीक्षा और भर्ती परीक्षा दोनों के लिए अलग-अलग शुल्क देना पड़ता है। कई बार परीक्षा देने के लिए रुपए उधार तक लेने पड़ते हैं। इसके बाद पेपर लीक हो जाए तो पैसा, समय और मेहनत सब बर्बाद हो जाते हैं। ऐसी घटनाओं से युवा मानसिक रूप से भी परेशान होते हैं। सरकार को पात्रता परीक्षा और प्रतियोगी परीक्षाएं नि:शुल्क करनी चाहिए।
-प्रिया सिंह, कॉलेज स्टूडेन्ट
नौकरी के नाम पर बना दिया धंधा
सरकार को भर्ती परीक्षाओं के लिए अलग बजट की व्यवस्था करनी चाहिए। पात्रता परीक्षा, प्रतियोगी परीक्षा और परीक्षा केन्द्र तक पहुंचने की व्यवस्था में युवाओं से शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए। शहरों के मुकाबले गांवों के बेरोजगार युवाओं की आर्थिक स्थिति ज्यादा कमजोर है। परिवार जैसे-तैसे घर चलाते हैं और ऊपर से परीक्षा शुल्क का बोझ डाल दिया जाता है।
-अनिल मेघवाल, कॉलेज स्टूडेन्ट
फीस लेते हैं, नौकरी की गारंटी नहीं
सरकार छात्र-छात्राओं के साथ अन्याय कर रही है। पहले आवेदन और परीक्षा के नाम पर अलग-अलग शुल्क लिया जाता है और फिर नौकरी की कोई गारंटी नहीं होती। यदि परीक्षा में गड़बड़ी या पेपर लीक हो जाए तो युवाओं की मेहनत और पैसा दोनों बर्बाद हो जाते हैं। सरकार को इस समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए।
- प्रिया बैरवा, कॉलेज स्टूडेन्ट
नौकरी लगे, तब लेना शुल्क
पात्रता परीक्षा और भर्ती परीक्षा से जुड़े शुल्क को खत्म कर देना चाहिए। सरकार चाहे तो नौकरी लगने के बाद कर्मचारी से शुल्क की राशि वसूल सकती है। बेरोजगार युवा पहले ही आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं। ऐसे में परीक्षा शुल्क, दस्तावेज और ई-मित्र का खर्च उनकी परेशानी और बढ़ा देता है। पेपर लीक जैसी स्थिति में तो पूरा खर्च बेकार चला जाता है और एक साल भी खराब हो जाता है।
-हिमांशु मीणा, कॉलेज स्टूडेन्ट

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