पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है

संघर्ष को दी मात, अब संवार रहे बच्चों का भविष्य

पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है

खलिहानों में जाकर जगाई शिक्षा की अलख।

कोटा। मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। इस उक्ति को चरितार्थ कर दिखाया है कोटा जिले के लालाहेड़ा राजकीय प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत शिक्षक रेवतीरमण नागर ने। अभावों में पले-बढ़े और विपरित परिस्थितियों से लड़कर निकले रेवतीरमण आज उन हजारों युवाओं के लिए मिसाल हैं, जो संसाधनों की कमी का रोना रोते हैं। अपनी मेहनत के दम पर न केवल उन्होंने उच्च शिक्षा में हमेशा प्रथम श्रेणी प्राप्त की, बल्कि एक शिक्षक के रूप में अपनी कर्तव्यनिष्ठा से सरकारी स्कूलों के प्रति समाज का नजरिया भी बदल दिया। उनके इसी जज्बे को साल 2023 में राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार से नवाजा गया। नागर ने बताया कि हम तीन भाई जिनमें बड़े भाई भी सरकारी शिक्षक है, दूसरा में स्वयं ,तीसरे भाई भी प्राइवेट स्कूल में कार्यरत हैं।

अभावों के बीच रहा शिक्षा का सफर 
रेवतीरमण नागर ने बताया कि उनका बचपन काफी संघर्षपूर्ण रहा। उनके पिता खेती का कार्य करते थे और घर की आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं थी। घर की तंगहाली के चलते उन्होंने कोटा में मामा के पास रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की।

2015 में शुरू हुआ सेवा का संकल्प
साल 2015 में रेवतीरमण का चयन शिक्षक के पद पर हुआ। उनकी पहली पोस्टिंग सुल्तानपुर के राजकीय प्राथमिक विद्यालय छोटी जाखड़ौन्द में हुई। स्कूल ज्वाइन करते ही उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती कम नामांकन की थी। उन्होंने हार मानने के बजाय विद्यालय में बच्चों की संख्या बढ़ाने (नामांकन वृद्धि) पर जोर दिया और ग्रामीण परिवेश में शिक्षा की अलख जगाई।

खेत-खलिहानों तक पहुंचे, ड्रॉप आउट बच्चों को जोड़ा 
जब उनका स्थानांतरण राजकीय प्राथमिक विद्यालय लालाहेड़ा में हुआ, तो वहां भी स्थिति चुनौतीपूर्ण थी। स्कूल में बच्चों की संख्या काफी कम थी और कई बच्चे पढ़ाई छोड़कर मजदूरी करने जा रहे थे। नागर ने हार नहीं मानी और खुद घर-घर व खेतों में जाकर अभिभावकों से संपर्क किया। उन्होंने उन बच्चों को शिक्षा के महत्व के बारे में समझाया जो मजदूरी में लगे थे। विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए उन्होंने माता-पिता को प्रेरित किया कि वे बच्चों को स्कूल भेजें। उनके इस 'डोर-टू-डोर' अभियान का नतीजा यह रहा कि स्कूल से बाहर (ड्रॉप आउट) हो चुके बच्चे फिर से मुख्यधारा से जुड़ गए। वहीं स्कूल के बुनियादी ढांचे को सुधारने का बीड़ा भी उठाया। उन्होंने समाज के दानदाताओं को प्रेरित किया और उनके सहयोग से स्कूल में रंग-रोगन का कार्य करवाया, पानी की टंकी बनवाई और बच्चों के लिए अन्य आवश्यक सुविधाएं जुटाईं। उनके इन प्रयासों से स्कूल का वातावरण निजी स्कूलों जैसा आकर्षक नजर आने लगा है।

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सम्मान की चमक: जिला स्तर से राज्य स्तर तक
रेवतीरमण नागर के समर्पण को पहचान मिलना तब शुरू हुई जब साल 2022 में उन्हें जिला स्तर पर सम्मानित किया गया। उनकी मेहनत और निष्ठा का सफर यहीं नहीं रुका। साल 2023 में जयपुर में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, अध्यक्ष डॉ. बुलाकी दास (बीडी)कल्ला शिक्ष मंत्री, विशिष्ट अतिथि जाहिदा खान राज्यमंत्री विज्ञान एवं प्रौद्योगिक विभाग स्वतंत्र प्रभार, शिक्षा सचिव नवीन जैन ने उन्हें राज्य स्तरीय पुरस्कार से नवाजा। यह सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि उन सभी सरकारी शिक्षकों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों में बदलाव लाने का जज्बा रखते हैं।

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