भारत-GCC मुक्त व्यापार समझौते की ओर बड़ा कदम, व्यापार और रणनीतिक रिश्तों को मिलेगी नई गति
भारत ने गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के साथ FTA की शर्तों पर किए साइन
नई दिल्ली। भारत ने हाल ही में अमेरिका के साथ व्यापार समझौते किया, जिसके बाद अमेरिका ने अपने टेरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया था और अब भारत ने एक और कदम बढ़ाया है। जानकारी के अनुसार, भारत ने गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की दिशा में अहम प्रगति करते हुए गुरुवार को टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस पर हस्ताक्षर कर दिए। इसके साथ ही वर्ष 2004 से रुकी हुई भारत-GCC व्यापार वार्ता को दोबारा औपचारिक रूप से शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है। यह कदम न केवल आर्थिक बल्कि भू-राजनीतिक दृष्टि से भी भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत और जीसीसी के बीच FTA वार्ता की शुरुआत 2004 में फ्रेमवर्क एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर के साथ हुई थी। इसके बाद 2006 और 2008 में दो दौर की बातचीत हुई, लेकिन 2011 में GCC ने वैश्विक स्तर पर सभी व्यापार वार्ताएं रोक दी थीं। नवंबर 2022 में GCC के सेक्रेटरी जनरल की भारत यात्रा के बाद इस प्रक्रिया में नई जान आई। अक्टूबर 2023 में GCC ने संशोधित टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस साझा किए, जिन पर अब दोनों पक्षों की सहमति बन गई है।
GCC में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन शामिल हैं। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि इस समझौते से भारत और GCC देशों के बीच व्यापार, निवेश और रणनीतिक संबंध और मजबूत होंगे। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा तथा वैश्विक स्तर पर भारत की आर्थिक स्थिति और सुदृढ़ होगी।
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत-GCC द्विपक्षीय व्यापार 178.56 अरब डॉलर रहा, जो भारत के कुल वैश्विक व्यापार का लगभग 15.4 प्रतिशत है। इसमें भारत का निर्यात 56.87 अरब डॉलर और आयात 121.66 अरब डॉलर रहा। UAE के बाद सऊदी अरब भारत का दूसरा सबसे बड़ा GCC व्यापार साझेदार है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह FTA खाद्य प्रसंस्करण, बुनियादी ढांचा, पेट्रोकेमिकल्स, आईसीटी, ऊर्जा और विनिर्माण क्षेत्रों को बड़ा प्रोत्साहन देगा। साथ ही, कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस पर निर्भरता को संतुलित करने तथा निर्यात विविधीकरण में भी मदद करेगा।

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