पार्किंसन का इलाज खोजने के करीब पहुंचे वैज्ञानिक! दिमाग में फिर उगेंगी नष्ट हो चुकी कोशिकाएं?

दिमाग में दोबारा विकसित होंगी कोशिकाएं

पार्किंसन का इलाज खोजने के करीब पहुंचे वैज्ञानिक! दिमाग में फिर उगेंगी नष्ट हो चुकी कोशिकाएं?
पार्किंसन के मरीजों के लिए जापान से बड़ी उम्मीद। वैज्ञानिकों ने स्टेम सेल तकनीक से दिमाग में डोपामाइन बनाने वाली कोशिकाएं दोबारा विकसित करने की कोशिश की है। सात मरीजों पर हुए शुरुआती परीक्षण में छह का आकलन किया गया, जिनमें चार के लक्षणों में सुधार दिखा। हालांकि, इसे स्थायी इलाज मानने से पहले बड़े परीक्षणों के नतीजों का इंतजार करना होगा।

टोक्यो। हाथ-पैरों में कंपन, चलने-फिरने में परेशानी और शरीर का संतुलन बिगड़ना, पार्किंसन बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए ये समस्याएं रोजमर्रा की जिंदगी को मुश्किल बना देती हैं। इस बीमारी का फिलहाल कोई स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं है। हालांकि, जापान के वैज्ञानिकों ने एक नई स्टेम सेल तकनीक के जरिए इसके उपचार की उम्मीद जगाई है। शुरुआती परीक्षण में इस तकनीक के उत्साहजनक नतीजे सामने आए हैं। इसे इंड्यूस्ड प्लुरिपोटेंट स्टेम सेल (आईपीएस) तकनीक कहा जाता है। इससे दिमाग में डोपामाइन बनाने वाली कोशिकाओं को दोबारा विकसित करने की कोशिश की जा रही है।

दिमाग में दोबारा विकसित होंगी कोशिकाएं

पार्किंसन में दिमाग की वे कोशिकाएं धीरे-धीरे नष्ट होने लगती हैं, जो शरीर की गतिविधियों को नियंत्रित करने वाले डोपामाइन रसायन का निर्माण करती हैं। जापान के वैज्ञानिकों ने स्वस्थ डोनर की स्टेम सेल से डोपामाइन बनाने वाली कोशिकाओं के शुरुआती रूप तैयार किए हैं। इन्हें मरीज के दिमाग के खास हिस्से में प्रत्यारोपित किया जाता है, ताकि ये विकसित होकर डोपामाइन का उत्पादन कर सकें। आईपीएस तकनीक में शरीर की सामान्य विकसित कोशिकाओं को दोबारा शुरुआती अवस्था में लाकर उनसे जरूरत के मुताबिक नई कोशिकाएं तैयार की जाती हैं।

सात मरीजों पर हुआ परीक्षण

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क्योटो यूनिवर्सिटी अस्पताल में 50 से 69 वर्ष की उम्र के सात मरीजों पर इस तकनीक का शुरुआती परीक्षण किया गया। मरीजों के दिमाग के दोनों हिस्सों में स्टेम सेल से तैयार कोशिकाएं प्रत्यारोपित की गईं। मेडिकल जर्नल नेचर में प्रकाशित नतीजों के अनुसार, छह मरीजों में इलाज के प्रभाव का आकलन किया जा सका। इनमें चार मरीजों के लक्षणों में सुधार देखा गया, जबकि पांच मरीजों में दवा लेने के बाद की स्थिति भी बेहतर हुई। कुछ मरीजों में हल्के दुष्प्रभाव भी सामने आए।

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अभी स्थायी इलाज का दावा नहीं

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विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती नतीजे उम्मीद जगाने वाले हैं, लेकिन इसे पार्किंसन का स्थायी इलाज मानना जल्दबाजी होगी। जापान में इस उपचार को शर्तों के साथ मंजूरी मिली है। कंपनी मार्च 2029 तक 20 से 30 मरीजों पर इसका परीक्षण करने की योजना बना रही है। इसके बाद ही इसकी सुरक्षा और लंबे समय तक प्रभावशीलता को लेकर अधिक स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।

Tags: cells

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