इजरायल से भारत को 40 हजार लाइट मशीन गनों की आपूर्ति शीघ्र 

भारत बेहद खास मित्र और रक्षा साझीदार 

इजरायल से भारत को 40 हजार लाइट मशीन गनों की आपूर्ति शीघ्र 
इजरायल की रक्षा कंपनी IWI अगले साल से भारत को 40 हजार एलएमजी की आपूर्ति शुरू करेगी। साथ ही 1.70 लाख आधुनिक कार्बाइन के लिए समझौता अंतिम चरण में है। इसमें भारत फोर्ज और अडाणी समूह की अहम हिस्सेदारी होगी।

तेल अवीब। इजराइल की एक प्रमुख रक्षा कंपनी ने कहा कि वह अगले साल की शुरूआत से ही भारत को 40 हजार लाइट मशीन गन (एलएमजी) की पहली खेप देना शुरू करेगी। इसके साथ ही कंपनी करीब एक लाख 70 हजार आधुनिक कार्बाइन देने के लिए एक अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के अंतिम चरण में है।  

इजरायल वेपन इंडस्ट्रीज (आईडब्ल्यूआई) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) शुकी श्वार्ट्ज ने कहा कि उनकी कंपनी भारतीय गृह मंत्रालय की कई एजेंसियों के साथ मिलकर पिस्तौल, राइफल और मशीन गन जैसे हथियारों की भारत में बिक्री पर काम कर रही है। एक इजरायली राजनतिक ने कहा कि भारत हमारा बेहद खास मित्र और सुरक्षा मामलों का अहम साझीदार है। हमारे पास कोई ऐसी तकनीक नहीं है, जिसे हम भारत से शेयर नहीं कर सकते। 

एक न्यूज चैनल से प्राप्त समाचार के अनसार श्वार्ट्ज ने कहा, हम अभी तीन बड़े कार्यक्रमों में शामिल हैं। पहला 40 हजार लाइट मशीन गन का अनुबंध है, जिस पर पिछले साल हस्ताक्षर हुए थे। हमने सभी परीक्षण और सरकारी जांच पूरी कर ली है और हमें उत्पादन का लाइसेंस मिल गया है। हम साल की शुरूआत में पहली खेप देने की तैयारी में हैं। उन्होंने कहा कि एलएमजी की आपूर्ति पांच वर्षों तक चलेगी। उन्होंने कहा कि वह इससे जल्दी भी आपूर्ति कर सकते हैं, लेकिन पहली खेप साल की शुरूआत में दी जाएगी। श्वार्ट्ज ने कहा कि दूसरा कार्यक्रम सीक्यूबी (क्लोज क्वार्टर्स बैटल) कार्बाइन का टेंडर है। 

इसमें उनकी कंपनी ने दूसरी सबसे बड़ी बोली लगाई थी, जबकि भारत फोर्ज मुख्य बोली लगाने वाली कंपनी है। उन्होंने कहा, हम इस अनुबंध के 40 फीसदी हिस्से की आपूर्ति करना चाहते हैं। हम अनुबंध पर हस्ताक्षर से ठीक पहले के चरण में हैं और मुझे लगता है कि यह इस साल के अंत तक या अगले साल की शुरूआत में पूरा हो जाएगा। 

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40 फीसदी उत्पादन अडानी गु्रप को

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सीक्यूबी कार्बाइन की 60 फीसदी आपूर्ति भारत फोर्ज द्वारा की जाएगी, जबकि बाकी 40 फीसदी (1,70,000 यूनिट) अडाणी ग्रुप की कंपनी पीएलआर सिस्टम्स द्वारा दी जाएगी। आर्बेल तकनीक के बारे में श्वार्ट्ज ने बताया कि यह एक कंप्यूटरीकृत हथियार प्रणाली है, जिसमें एक जटिल एल्गोरिदम यह पता करता है कि कब कोई सैनिक सही निशाने पर है और फिर बहुत तेजी और सटीकता से फायर करता है। उन्होंने कहा कि भारत को इस तकनीक के साथ जोड़ने पर शुरूआती बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा, हम अलग-अलग एजेंसियों से आर्बेल तकनीक को अपनाने को लेकर शुरूआती चर्चा में हैं।

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एक बार वे इसे लेने का फैसला कर लें, तो हम इसकी इजरायल और भारत में संयुक्त रूप से बनाकर आपूर्ति करेंगे। उन्होंने बताया कि भारत में इस सह-उत्पादन की जिम्मेदारी पीएलआर सिस्टम्स संभालेगी। 

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