अमेरिका ईरान वार्ता: जून 2025 के हमलों का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा, जिनेवा में ईरान से समझदारी की उम्मीद

ट्रंप की ईरान को चेतावनी: जिनेवा वार्ता आज

अमेरिका ईरान वार्ता: जून 2025 के हमलों का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा, जिनेवा में ईरान से समझदारी की उम्मीद

राष्ट्रपति ट्रंप ने जिनेवा परमाणु वार्ता से पूर्व ईरान को 'तर्कसंगत' होने की सलाह दी है। उन्होंने बी-2 बमवर्षक हमलों का हवाला देते हुए कहा कि समझौता न करने के परिणाम गंभीर होंगे।

वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर जून 2025 में हुए हमलों का जिक्र करते हुए कहा है कि जिनेवा में होने वाली बैठक में ईरान से समझदारी की उम्मीद है। राष्ट्रपति ट्रंप ने सोमवार को कहा कि वह अमेरिका और ईरान के बीच मंगलवार को जिनेवा में होने वाली उच्च स्तरीय परमाणु (एजेंसी) में अप्रत्यक्ष रूप से शामिल रहेंगे। उन्होंने फोर्दो, इस्फहान और नतांज पर हुए अमेरिकी हमलों का उल्लेख करते हुए ईरान से बातचीत के दौरान तर्कसंगत रुख अपनाने की अपील की। 

राष्ट्रपति ट्रंप ने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत में कहा, मैं अप्रत्यक्ष रूप से शामिल रहूंगा और ये बेहद महत्वपूर्ण होंगी। मुझे उम्मीद है कि ईरान अधिक तर्कसंगत होंगे। जिनेवा बैठक में अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति के सलाहकार जेरेड कुशनर के शामिल होने की संभावना है। समझौते की संभावनाओं पर ट्रंप ने कहा कि ईरान पारंपरिक रूप से कड़ा रुख अपनाता रहा है, लेकिन पिछले वर्ष अमेरिकी हमलों से उसने सबक लिया है और अब (एजेंसी) के लिए अधिक इच्छुक है। 

उन्होंने कहा, मुझे नहीं लगता कि वे समझौता न करने के परिणाम चाहते हैं। यह बहुत महत्वपूर्ण होगा। ईरान कठिन (एजेंसी)कार है, बल्कि मैं कहूंगा कि वे खराब (एजेंसी)कार हैं। हम समझौता कर सकते थे, बी-2 भेजने की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने कहा, वे समझौता करना चाहते हैं। पश्चिमी एशिया में शांति है, क्योंकि हमने उनके परमाणु ठिकानों पर बी-2 बॉम्बर से हमले किये। अगर हम हमले न करते तो उन्होंने एक महीने के भीतर परमाणु हथियार हासिल कर लिया होता। अगर ऐसा होता, तो समझौता ही अलग होता। 

उल्लेखनीय है कि, जून में हुए अमेरिकी हमलों से पहले अमेरिका चाहता था कि ईरान यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह रोके, जबकि ईरान ऐसा करने के अपने अधिकार पर जोर दे रहा था। जिनेवा की बैठक छह फरवरी को ओमान में हुए पहले अप्रत्यक्ष दौर के बाद हो रही है। उस बैठक को दोनों पक्षों ने अच्छी शुरुआत बताया था, हालांकि मतभेद बने रहे। अमेरिका मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय समूहों जैसे हिजबुल्लाह पर भी चर्चा चाहता है, जबकि ईरान का कहना है कि उसका मिसाइल कार्यक्रम (एजेंसी) का विषय नहीं है और वह केवल प्रतिबंधों में राहत के बदले परमाणु प्रतिबंधों पर बात करेगा। 

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इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने जिनेवा में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) प्रमुख से मुलाकात की और सोशल मीडिया पर लिखा कि वह निष्पक्ष और न्यायसंगत समझौते के लिए वहां पहुंचे हैं। उन्होंने कहा, धमकियों के सामने आत्मसमर्पण की कोई संभावना नहीं है।

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आईएईए ने पिछले वर्ष इजरायल-अमेरिका हमलों के बाद ईरान के 440 किलोग्राम उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार पर स्पष्टता मांगी है और नतांज, फोर्दो तथा इस्फहान स्थलों तक पूर्ण पहुंच की मांग की है। ईरान ने सोमवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में एक सैन्य अभ्यास भी किया। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका उसके ऊपर कोई भी हमला करता है तो वह होर्मुज को बंद कर देगा, जिससे दुनिया का 20 प्रतिशत तेल व्यापार बाधित होगा और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आएगा। अमेरिका चाहता है कि ईरान परमाणु हथियारों के अलावा अपने मिसाइल कार्यक्रम पर भी बात करे, लेकिन ईरान का कहना है कि वह प्रतिबंध हटाने के लिए सिर्फ परमाणु मुद्दों पर ही बात करेगा। 

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इस बीच, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोमवार को हंगरी के दौरे पर कहा कि ईरान के साथ समझौता करना मुश्किल होगा। रुबियो ने कहा, मुझे लगता है कि यहां कूटनीतिक तरीके से एक समझौते पर पहुंचने का मौका है. लेकिन मैं इसे बढ़ा-चढ़ाकर भी नहीं बताना चाहता।

रुबियो ने कहा, यह मुश्किल होने वाला है। किसी के लिए भी ईरान के साथ असली समझौता करना बहुत मुश्किल रहा है, क्योंकि हम कट्टरपंथी शिया मौलवियों के साथ काम कर रहे हैं जो धार्मिक फैसले ले रहे हैं, भू-राजनैतिक नहीं। ईरान के साथ समझौता करना आसान नहीं है, लेकिन हम कोशिश करेंगे। 

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