हमें अमेरिकी होना मंजूर नहीं, हमें आजादी पसंद, खुद भविष्य तय करेंगे, ग्रीनलैंडवासियों ने ट्रम्प को सुनाई खरी-खरी
ग्रीनलैंड का ट्रंप को करारा जवाब: 'हम कभी अमेरिकी नहीं बनेंगे'
ग्रीनलैंड के सभी पांच राजनीतिक दलों ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की अधिग्रहण की धमकी को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड का भविष्य केवल वहाँ के लोग तय करेंगे।
कोपेनहेगेन । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर धमकी भरा लहजा अपनाया हुआ है। इतना ही नहीं अमेरिकी नेता भी ग्रीनलैंड पर नियंत्रण को लेकर बयानबाजी कर रहे हैं। इस बीच ग्रीनलैंड की संसद के सभी पांच प्रमुख राजनीतिक दलों ने संयुक्त बयान जारी कर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को दो टूक जवाब दिया है। राजनीतिक दलों ने ट्रंप की ग्रीनलैंड को अमेरिका के नियंत्रण में लेने की धमकियों को कड़े शब्दों में खारिज किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि ग्रीनलैंड अमेरिकन नहीं होगा और उसका भविष्य सिर्फ ग्रीनलैंड के लोगों की तरफ से तय किया जाना चाहिए।
बयान में पांचों दलों, जिसमें प्रधानमंत्री जेन्स फ्रेडरिक नीलसन सहित विपक्षी दल नालेराक के नेता भी शामिल हैं, उन्होंने कहा कि वे किसी भी अमेरिकी अधिग्रहण के गंभीर रूप से असम्मानजनक रुख के खिलाफ हैं। देर रात जारी बयान में नेताओं ने साफ कहा कि हम अमेरिकी नहीं होंगे, हम डेनिश नहीं होंगे, हम ग्रीनलैंडवासी हैं। सभी दलों की यह एकता विशेष रूप से इसलिए अहम है, क्योंकि इसमें विपक्षी पार्टी नालेराक के नेता पेले ब्रोबर्ग भी शामिल हैं, जो वाशिंगटन के साथ घनिष्ठ संबंध बनाने के लिए सबसे अधिक इच्छुक रही हैं।
उल्लेखनीय है कि कुछ ही दिन पहले ब्रोबर्ग ने ग्रीनलैंड से डेनमार्क को दरकिनार करते हुए सीधे अमेरिका के साथ बातचीत करने का आह्वान किया था। अब बयान में इस बात पर जोर दिया गया है कि ग्रीनलैंड का भविष्य खुद ग्रीनलैंड के लोगों द्वारा तय किया जाना चाहिए, अंतर्राष्ट्रीय कानून और आत्मनिर्णय के अधिकार का सम्मान होना चाहिए।
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले सप्ताह वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य अभियान के बाद अपनी बयानबाजी को और तेज कर दिया है। हाल ही में न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने साफ कहा कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी स्वामित्व सफलता के लिए मनोवैज्ञानिक रूप से जरूरी है। इसी के साथ उन्होंने सैन्य बल के प्रयोग की संभावना से इनकार नहीं किया। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अब रूस और चीन को रोकने के लिए ग्रीनलैंड पर अमरिकी कब्जे को जरूरी बता रहे हैं, लेकिन ग्रीनलैंड के लोगों ने उनकी इस दलील को खारिज कर दिया है और उन्हें दोटूक कहा है कि ग्रीनलैंड पर कब्जे की उनकी कोशिश कभी कामयाब नहीं होगी। ग्रीनलैंडवासियों ने कहा कि ग्रीनलैंड के लोग स्वतंत्रताप्रिय हैं और उनकी स्वतंत्रता से कोई खिलवाड़ नहीं करे।
डेनमार्क में भी राजनीतिक हलचल तेज
ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणियों पर डेनमार्क में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। डेनमार्क की कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद रासमस जारलोव ने अमेरिका के रुख को न सिर्फ परेशान करने वाला बल्कि पूरी तरह अस्वीकार्य करार दिया है। रासमस जारलोव ने कहा कि यह बेहद चौंकाने वाली बात है कि संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे सहयोगी देश द्वारा सैन्य कार्रवाई की धमकी दी जा रही है। उन्होंने कहा, यह अभूतपूर्व है कि आप अपने ही मित्र देशों को धमकाएं ऐसे देशों को, जिन्होंने कभी आपके खिलाफ कुछ नहीं किया और हमेशा वफादार रहे।
वफादार दोस्तों को धमकाने का हैरतअंगेज रवैया
डेनिश सांसद ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर डेनमार्क जैसे देश को इस तरह की आक्रामक भाषा का सामना करना पड़ सकता है, तो यह दुनिया के अन्य देशों के लिए भी खतरे की घंटी है। उन्होंने कहा अगर डेनमार्क सुरक्षित नहीं है, तो फिर कोई भी देश सुरक्षित नहीं। ग्रीनलैंड के संदर्भ में यारलोव ने ट्रंप के तर्कों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि ग्रीनलैंड की ओर से न तो कोई खतरा है और न ही किसी प्रकार की शत्रुता। उन्होंने जोड़ा ग्रीनलैंड के मामले में किसी भी तरह का बहाना नहीं बनता, न कोई धमकी है, न दुश्मनी।

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