'टुमॉरो मेकर्स' की शुरुआत: वंचित पृष्ठभूमि के प्रतिभावान छात्रों को मिलेंगे तरक्की के समान अवसर

वंचित विद्यार्थियों को समान अवसर

'टुमॉरो मेकर्स' की शुरुआत: वंचित पृष्ठभूमि के प्रतिभावान छात्रों को मिलेंगे तरक्की के समान अवसर

गोदरेज फाउंडेशन ने असमानता को दूर करने के लिए राष्ट्रीय मंच ‘टुमॉरो मेकर्स’ लॉन्च किया है। इसका उद्देश्य वंचित पृष्ठभूमि के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को मेंटर्स और संस्थानों से जोड़ना है। यह पहल स्टेम (STEM), कला और रक्षा क्षेत्र में भविष्य के नेतृत्वकर्ताओं की एक मजबूत पाइपलाइन तैयार करेगी।

भारत की शिक्षा व्यवस्था में, खासकर छोटे शहरों और वंचित समुदायों के विद्यार्थियों के लिए किस कमी को टुमॉरो मेकर्स दूर करना चाहते हैं?

उमर मोमिन, गोदरेज फाउंडेशन हेड ने मीडिया को बताया कि भारत में प्रतिभा की कमी नहीं है। कमी है, तो एक समान अवसरों की। देश में सबसे अधिक आय वर्ग वाले परिवारों के 51 प्रतिशत युवा उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ते हैं, जबकि सबसे कम आय वर्ग वाले परिवारों के केवल 8 प्रतिशत युवा ही उच्च शिक्षण संस्थानों तक पहुँच पाते हैं। बिना सपोर्ट के कम आय वर्ग वाले परिवारों के प्रतिभाशाली विद्यार्थी अपनी क्षमताओं का विकास करने में असमर्थ हो जाते हैं। इस कमी को दूर करने के लिए गोदरेज इंडस्ट्रीज़ ग्रुप में 15 प्रतिशत हिस्सेदारी वाले समाजसेवी ट्रस्ट, गोदरेज फाउंडेशन ने टुमॉरो मेकर्स की शुरुआत की है। यह एक राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म है, जो वंचित पृष्ठभूमि के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को पहचानने और उन्हें बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। यह इन विद्यार्थियों को एक मजबूत पार्टनर ईकोसिस्टम के माध्यम से मेंटर्स और संस्थानों से जोड़ता है तथा अवंति फैलोज़, दक्षणा, स्लैम आउट लाउड, मेकरघाट, और डेल्टा स्क्वैड फाउंडेशन जैसे संगठनों के सहयोग से उन्हें अवसर उपलब्ध कराता है। हमारा लक्ष्य उन्हें केवल शिक्षा प्राप्त करने में मदद करना ही नहीं है, बल्कि हम स्टेम (साईंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथ्स), इनोवेशन, कला और रक्षा सेवाओं में नेतृत्व का विकास भी करना चाहते हैं। हमारा मानना है कि अवसर प्रतिभा के आधार पर मिलने चाहिए, न कि बैकग्राउंड या पिन कोड के आधार पर।

टुमॉरो मेकर्स के अंतर्गत स्टेम के साथ कला और रक्षा को शामिल करना जरूरी क्यों था?

जैसा मैंने पहले बताया कि टुमॉरो मेकर्स की बुनियाद यह विश्वास है कि अवसर प्रतिभा के आधार पर मिलने चाहिए। लेकिन प्रतिभा कोई एक क्षेत्र में नहीं होती, इसलिए अवसर भी भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में मिलने चाहिए। माता-पिता अक्सर इंजीनियरिंग या मेडिसीन की ओर झुकाव रखते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि हर बच्चे में कई क्षेत्रों में आगे बढ़ने की प्रतिभा होती है। स्टेम के लिए हमारा सहयोग अवंति फैलोज़, दक्षणा और जेनवाईज़ कर रहे हैं। कला के क्षेत्र में हमें स्लैम आउट लाउड की मदद मिल रही है। वहीं रक्षा क्षेत्र में डेल्टा स्क्वैड फाउंडेशन और युवातेजस हमें सहयोग दे रहे हैं। विभिन्न तरह की प्रतिभाओं को बढ़ावा देने में गहरी विशेषज्ञता के साथ ये पार्टनर जमीनी स्तर पर गहरी पकड़ और समुदाय का विश्वास भी रखते हैं। इससे हमें विभिन्न प्रतिभाओं और महत्वाकांक्षाओं वाले विद्यार्थियों को अनेक अवसर प्रदान करने में मदद मिलेगी। 

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आज वंचित बैकग्राउंड के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को किन सबसे बड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ता है?

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इन विद्यार्थियों के लिए सबसे बड़ी बाधाएं पहुँच और एक्सपोज़र की हैं। उदाहरण के लिए, 27 से 37 प्रतिशत विद्यार्थी प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए पेड कोचिंग सिस्टम पर निर्भर हैं, जिससे अवसर की उपलब्धता आर्थिक क्षमता पर निर्भर हो गई है। छोटे शहरों के विद्यार्थियों को कोचिंग उपलब्ध नहीं होती हैं। साथ ही, उन्हें मेंटरशिप, मिलकर तैयारी करने वाले साथी, प्रतियोगिताओं का एक्सपोज़र और उनके लिए मौजूद अवसरों का मार्गदर्शन भी नहीं मिल पाता है। नतीजा यह होता है कि इस सिस्टम द्वारा विद्यार्थी प्रतिभा नहीं बल्कि सुविधा की उपलब्धता के आधार पर आगे बढ़ जाते हैं। टुमॉरो मेकर्स के माध्यम से हम सभी विद्यार्थियों को समान अवसर उपलब्ध कराना चाहते हैं, ताकि प्रतिभाशाली विद्यार्थी, चाहे किसी भी स्थान से आए हों, उन्हें समान रूप से वो अवसर प्राप्त हो सकें।

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भारत के युवाओं के लिए टुमॉरो मेकर्स का क्या दीर्घकालिक प्रभाव होगा?

हमारा लक्ष्य साफ है। हम वंचित बैकग्राउंड के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को अवसर उपलब्ध कराना चाहते हैं ताकि वो अपनी क्षमताओं का विकास कर सकें। पहले साल, हम संरचनाबद्ध तरीके से 5,000 से 10,000 विद्यार्थियों तक पहुँचेंगे। हमारी इस पहल में हमारे पार्टनर हमारी मदद करेंगे। इसके बाद हम क्वालिटी को बनाए रखते हुए अपनी इस पहल का विस्तार करेंगे। व्यापक स्तर पर यह हमारे देश के भविष्य से जुड़ा है। भारत का भविष्य केवल औसत सुधारों द्वारा तय नहीं होगा, बल्कि इस बात से तय होगा कि क्या विभिन्न आय, भौगोलिक क्षेत्रों और पहचान वाली असाधारण प्रतिभाओं को प्रभावशाली पदों और नेतृत्व तक पहुँचने का अवसर मिलेगा या नहीं। इसलिए हमारा दीर्घकालिक लक्ष्य विभिन्न स्थानों और सामाजिक आर्थिक बैकग्राउंड वाली प्रतिभाओं को आगे लाकर भविष्य के नेतृत्वकर्ताओं की एक पाईपलाईन तैयार करना है।
साथ ही, हम पहली जनरेशन के सफल लोगों का ज्यादा बड़ा समूह बनाना चाहते हैं। क्योंकि जब एक युवा सफल होता है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार और समुदाय पर पड़ता है।

टुमॉरो मेकर्स को देशव्यापी प्लेटफॉर्म बनाने के लिए पार्टनर संगठनों और मेंटर्स के साथ सहयोग कितने महत्वपूर्ण हैं?

टुमॉरो मेकर्स का काम करने का तरीका पार्टनरशिप पर आधारित है। हम शुरू से ही हर काम अपने आप करना नहीं चाहते हैं। इसलिए हम उन संगठनों के साथ साझेदारी कर रहे हैं, जो प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने में गहरी विशेषज्ञता रखते हैं। उदाहरण के लिए अवंति फैलोज़ 7,000 से अधिक विद्यार्थियों तक पहुँच चुके हैं। स्लैम आउट लाउड ने 4.7 मिलियन से अधिक विद्यार्थियों को आगे बढ़ाया है और मेकरघाट 1.4 मिलियन से अधिक युवाओं से जुड़े हैं और 20,000 से अधिक एजुकेटर्स को प्रशिक्षित कर रहे हैं। इससे साफ हो जाता है कि इस ईकोसिस्टम के पास प्रमाणित और प्रभावशाली मॉडल है, पर वो सब टुकड़ों मंल काम कर रहे हैं। टुमॉरो मेकर्स इस प्रमाणित ईकोसिस्टम को उच्च क्षमता वाले विद्यार्थियों से जोड़ेंगे, जिन्हें पहचान से लेकर तैयार और करियर में आगे बढ़ने तक हर चरण में मार्गदर्शन उपलब्ध नहीं हो पाता है।

 

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