मतदाता अधिकारों पर कांग्रेस का बड़ा बयान, वोटिंग को मौलिक अधिकार का दर्जा देने की मांग
वोट के अधिकार को लेकर नई बहस
नई दिल्ली। कांग्रेस ने मतदान के अधिकार को मौलिक अधिकार का दर्जा देने की मांग करते हुए रविवार को कहा कि इससे इस अधिकार को सर्वोच्च स्तर का संवैधानिक और न्यायिक संरक्षण प्राप्त होगा। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया 'एक्स' पर एक बयान में कहा कि भारत में मतदान का अधिकार फिलहाल मौलिक नहीं बल्कि वैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 326 में सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का प्रावधान किया गया है जबकि मतदान की व्यवस्था जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और 1951 के तहत संचालित होती है।
रमेश ने कहा कि पिछले सात दशकों से इस बात पर बहस जारी है कि मतदान का अधिकार केवल वैधानिक अधिकार है अथवा इसे मौलिक अधिकार का दर्जा मिलना चाहिए। उन्होंने मार्च 2023 में 'अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ' मामले में न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी के असहमति वाले फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि उसमें मतदान के अधिकार को मौलिक अधिकार माना गया था। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय मतदाताओं को उम्मीदवारों के आपराधिक मामलों, वित्तीय हितों और राजनीतिक चंदे के स्रोतों के बारे में जानने के अधिकार, मतपत्र की गोपनीयता तथा 'नोटा' के माध्यम से सभी उम्मीदवारों को अस्वीकार करने के अधिकार को मान्यता दे चुका है। ऐसे में मतदान के अधिकार को केवल वैधानिक अधिकार बने रहना विसंगति है।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मतदान के अधिकार को मौलिक अधिकार का दर्जा दिए जाने से मतदाता दमन अथवा मनमाने ढंग से अयोग्य ठहराए जाने जैसे मामलों के खिलाफ अधिक प्रभावी संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।

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