उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत नहीें मिलने पर जेएनयू छात्रों का विरोध प्रदर्शन, सरकार के खिलाफ जमकर की नारेबाजी
खालिद और इमाम को जमानत न मिलने पर छात्रों का विरोध
जेएनयू परिसर में छात्रों ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज होने के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के खिलाफ नारे लगाए गए, जिसे भाजपा ने 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' की करतूत बताया है।
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्र नेताओं उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत न मिलने के एक दिन बाद छात्रों के एक समूह ने विश्वविद्यालय परिसर में विरोध-प्रदर्शन करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी की।
सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया गया है, जिसमें जेएनयू परिसर के अंदर इमाम और खालिद को जमानत नहीं मिलने के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन दिखाया गया है। इसमें छात्र सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात को प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ नारे लगा रहे हैं।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया पर कहा कि ये विवादित नारे जेएनयू में 'टुकड़े-टुकड़े' गैंग द्वारा लगाए गए थे। उन्होंने कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों के कुछ नेताओं पर खालिद और इमाम के पक्ष में बयान देकर सभी हदें पार करने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी संस्कृति से जुड़े छात्र अब पीएम मोदी और अमित शाह के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। शहजाद पूनावाला ने दावा किया कि अदालत के फैसले का विरोध करते हुए उदित राज, वृंदा करात, हुसैन दलवई और पृथ्वीराज चव्हाण जैसे कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों के कुछ नेताओं ने आरोपियों को 'निर्दोष' बताया है। भाजपा नेता ने कहा कि वीडियो में साफ दिख रहा है कि विरोध-प्रदर्शन में लगाए गये नारों से उन्होंने सभी हदें पार कर दी हैं। उन्होंने आरोप लगाया, ये वही लोग हैं जो नक्सलियों को शहीद कहते हैं।
उल्लेखनीय है कि, शीर्ष अदालत ने सोमवार को दिल्ली दंगों मामले में सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि यूएपीए की धारा 43डी (5) के तहत जमानत पर कानूनी रोक लागू होती है और इसलिए इस चरण में उनकी लगातार हिरासत में दखल नहीं दिया जा सकता।

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