उमर अब्दुल्ला का बड़ा बयान: बेगुनाहों की हत्या की इजाजत कोई धर्म नहीं देता, 10 दिनों के दौरान दो आतंकवादी हमले 

लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी

उमर अब्दुल्ला का बड़ा बयान: बेगुनाहों की हत्या की इजाजत कोई धर्म नहीं देता, 10 दिनों के दौरान दो आतंकवादी हमले 
दक्षिण कश्मीर में हाल ही में हुए आतंकवादी हमलों पर दुख जताते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि कोई भी धर्म निर्दोष लोगों की हत्या की इजाजत नहीं देता। उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों से नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऐसी हिंसक घटनाओं पर तुरंत प्रभावी रोक लगाने का आह्वान किया।

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा कि किसी भी धर्म में निर्दोष लोगों की हत्या की अनुमति नहीं है और ऐसी घटनाओं को रोकना एवं लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सुरक्षा एजेंसियों की जिम्मेदारी है। दक्षिण कश्मीर में पिछले 10 दिनों के दौरान दो आतंकवादी हमले हुए हैं। अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की 22 जुलाई को अनंतनाग के लाल चौक के निकट आतंकवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके नौ दिन बाद 31 जुलाई को कुलगाम जिले के किलम क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के दो गैर-स्थानीय मजदूरों पर संदिग्ध आतंकवादी ने गोली चला दी। इनमें से एक की मौके पर ही मौत हो गयी, जबकि दूसरे ने अगले दिन उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।

अब्दुल्ला ने श्रीनगर में एक गोल्फ प्रतियोगिता के दौरान संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि इन हत्याओं से उन्हें गहरा दुख पहुंचा है और इसकी जितनी भी निंदा की जाये, वह कम है। उन्होंने कहा, “ जिन लोगों की हत्या हुई, यह बहुत दुखद है। ऐसा नहीं होना चाहिए था।” अब्दुल्ला ने कहा कि निर्दोष लोगों को निशाना बनाये जाने का किसी भी परिस्थिति में औचित्य नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा, "इस तरह बेगुनाह लोगों की हत्या करने की इजाजत कोई धर्म नहीं देता। इसकी जितनी भी निंदा की जाये और इसके खिलाफ जितने भी शब्द कहे जायें, वे कम हैं।" अब्दुल्ला कहा कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी जिन एजेंसियों पर है, उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे इस प्रकार के हमलों को रोकें और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।

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