राजस्थान में सड़क सुरक्षा पर खर्च बढ़ा: हादसों में कमी नहीं, सड़क सुरक्षा पर लगातार बढ़ा फोकस; लेकिन दुर्घटनाओं का आंकड़े चिंताजनक
बजट के बावजूद दुर्घटनाओं पर नियंत्रण नहीं
जयपुर। राजस्थान में सड़क सुरक्षा के लिए लगातार योजनाएं और अभियान चलाए जाने के बावजूद सड़क दुर्घटनाओं पर अपेक्षित नियंत्रण नहीं हो पाया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2018-19 से 2023-24 के बीच राज्य में सड़क सुरक्षा से जुड़े कई मदों में खर्च और गतिविधियां बढ़ीं, लेकिन दुर्घटनाओं की स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है। दस्तावेज में दिए गए आंकड़े बताते हैं कि सड़क सुरक्षा के प्रयासों और उनके परिणामों के बीच अभी भी बड़ा अंतर है।
2018-19 में 38 फीसदी से बढ़कर 47 फीसदी तक पहुंचा अनुपात
आंकड़ों के अनुसार 2018-19 में संबंधित मद में 12,385 की तुलना में 5,049 का आंकड़ा दर्ज था, जो 40.77 प्रतिशत था। वर्ष 2019-20 में यह अनुपात 38.95 प्रतिशत, 2020-21 में 38 प्रतिशत, 2021-22 में 42.38 प्रतिशत, 2022-23 में 44.51 प्रतिशत और 2023-24 में बढ़कर 47 प्रतिशत हो गया। इस अवधि में कुल आंकड़ा भी 12,385 से बढ़कर 16,400 तक पहुंचा। दूसरे आंकड़ों में 2018-19 में 72.05 प्रतिशत से शुरू होकर 2023-24 में यह अनुपात 74.62 प्रतिशत तक पहुंचता दिखाई देता है। वर्ष 2020-21 में यह 55.93 प्रतिशत रहा, जबकि 2021-22 में 68.08 प्रतिशत और 2022-23 में 72.87 प्रतिशत दर्ज किया गया।
दुर्घटनाओं में कमी के लिए जरूरी है प्रभावी निगरानी
दस्तावेज में वर्षवार आंकड़ों के विश्लेषण में बताया गया है कि संबंधित अवधि में सड़क सुरक्षा के लिए किए गए प्रयासों के बावजूद दुर्घटनाओं की समस्या बनी रही। आंकड़ों में 2018-19 से 2023-24 के बीच कई वर्षों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। इससे साफ है कि केवल बजट या संसाधन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सड़क सुरक्षा उपायों की प्रभावी निगरानी और जमीनी स्तर पर उनके क्रियान्वयन की भी जरूरत है।
2024-25 के आंकड़ों का भी किया गया उल्लेख
दस्तावेज में 2024-25 से संबंधित आंकड़ों का उल्लेख करते हुए सड़क सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की गई है। साथ ही वर्ष 2025 के संदर्भ में भी दुर्घटनाओं और सड़क सुरक्षा उपायों से जुड़े विषयों का उल्लेख है। इसमें सड़क सुरक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों को और प्रभावी बनाने तथा दुर्घटनाओं में कमी लाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

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