म्यांमार में रोहिंग्या पर अत्याचार जारी, यूएन रिपोर्ट में अराकान आर्मी और सेना पर गंभीर आरोप

हजारों लोग पलायन को मजबूर

म्यांमार में रोहिंग्या पर अत्याचार जारी, यूएन रिपोर्ट में अराकान आर्मी और सेना पर गंभीर आरोप
संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट में म्यांमार के रखाइन प्रांत में रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ हो रहे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों का खुलासा हुआ है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के अनुसार, अराकान आर्मी और म्यांमार सेना जबरन सैन्य भर्ती, बच्चों से श्रम, यातना, भूमि कब्जे और यौन हिंसा में शामिल हैं, जिससे हजारों लोग पलायन को मजबूर हैं।

संयुक्त राष्ट्र। म्यांमार के रखाइन प्रांत में रोहिंग्या समुदाय को लगातार गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों का सामना करना पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में अराकान आर्मी और म्यांमार की सेना पर रोहिंग्या लोगों के खिलाफ जबरन भर्ती, जबरन श्रम, मनमानी गिरफ्तारी, यातना, यौन हिंसा और संपत्ति पर कब्जे समेत कई गंभीर आरोप लगाये गये हैं। रिपोर्ट के अनुसार, उत्तरी रखाइन में अराकान आर्मी के नियंत्रण वाले इलाकों में रोहिंग्या लोगों की आवाजाही, आजीविका और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच प्रतिबंधित की गयी है। उन पर जबरन कर वसूली और श्रम कराने के भी आरोप हैं। कई मामलों में रोहिंग्या लोगों को अपने घरों को तोड़कर विस्थापितों के शिविर, गैर-रोहिंग्या समुदायों के गांव और अराकान आर्मी के लिए निर्माण करने के लिए मजबूर किया गया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि रोहिंग्या लोगों को उनके मूल स्थानों पर लौटने की अनुमति नहीं दी जा रही है और उनकी जमीन पर गैर-रोहिंग्या समुदायों को बसाया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के विश्लेषण के अनुसार, उत्तरी रखाइन में करीब 2,000 एकड़ रोहिंग्या भूमि पर कथित रूप से कब्जा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2026 में उत्तरी रखाइन में रोहिंग्या लोगों से जबरन श्रम कराने के 2,353 मामले सामने आये, जिनमें 75 मामलों में बच्चे शामिल थे। कुछ मामलों में छह साल तक के बच्चों से भी श्रम कराने की जानकारी दी गयी है। अराकान आर्मी पर रोहिंग्या पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की जबरन भर्ती के भी आरोप हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि जबरन भर्ती के दौरान महिलाओं और लड़कियों को यौन हिंसा का सामना करना पड़ा। कई रोहिंग्या लोगों को कथित तौर पर हिरासत में लेकर यातना भी दी गयी और हिरासत में मौतों की भी जानकारी सामने आयी है।

हिंसा और जबरन भर्ती के कारण बड़ी संख्या में रोहिंग्या बंगलादेश की ओर पलायन कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2026 के अंत तक बांग्लादेश में 1,49,769 नये रोहिंग्या दर्ज किये गये थे। वहीं, म्यांमार की सेना पर भी रोहिंग्या लोगों की जबरन सैन्य भर्ती और पलायन रोकने के लिए कार्रवाई के आरोप हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में सेना ने 1,981 रोहिंग्या लोगों को जबरन भर्ती किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 में समुद्री रास्ते से पलायन करने वाले रोहिंग्या लोगों के लिए 892 लोगों की मौत या लापता होने के साथ यह सबसे घातक वर्ष रहा। साल 2026 में मई तक 4,665 लोगों ने समुद्री रास्ते से पलायन की कोशिश की, जिनमें 280 लोगों के मारे जाने या लापता होने की सूचना है।

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