कर्नाटक भर्ती विवाद में बढ़ा सियासी घमासान, गृह मंत्री के बयान पर विपक्ष ने खोला सरकार के खिलाफ मोर्चा
प्रियांक खरगे के बयान पर सियासी बवाल
बेंगलुरु। कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने सोमवार को यह कहकर राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया कि अगर प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी अपना आंदोलन जारी रखते हैं, तो पुलिस उन पर 'लाठीचार्ज' कर सकती है। उनके इस बयान पर बवाल मच गया है और विपक्ष ने परीक्षा में धांधली को लेकर फिर से उनके इस्तीफे की मांग की है। अपने इस्तीफे की मांगों पर प्रतिक्रिया देते हुए श्री खरगे ने कहा, "पहले वे 25 दिनों तक उपवास करें। उन्हें भूख हड़ताल पर बैठने दें। इसके बाद भी अगर वे नहीं मानते हैं, तो हम एक बार लाठीचार्ज करेंगे और उसके बाद मैं इस्तीफा दे दूंगा।"
यह बयान रविवार को विजयपुरा जिले के टिकोटा स्थित एक केंद्र पर आयोजित सिविल पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर अभ्यर्थियों के विरोध-प्रदर्शन के बीच आया है। अभ्यर्थियों का दावा है कि प्रश्नपत्र लगभग 30 मिनट देर से बांटे गये थे और अलग-अलग कक्षाओं में अलग-अलग प्रक्रियाओं का पालन किया गया। पुनर्परीक्षा की मांग करते हुए कई अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र से बाहर निकल आये। उनका आरोप था कि इन गड़बड़ियों के कारण उन्हें नुकसान हुआ है। वहीं परीक्षा अधिकारियों ने कहा है कि परीक्षा 'कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण' (केईए) के मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार आयोजित की गयी थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रश्नपत्र और ओएमआर शीट लेकर परीक्षा हॉल से बाहर जाने वाले अभ्यर्थियों को दोबारा प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गयी, क्योंकि उन्होंने नियमों का उल्लंघन किया था।
3,991 सिविल पुलिस कांस्टेबल पदों पर भर्ती के लिए पूरे कर्नाटक में 800 से अधिक केंद्रों पर आयोजित लिखित परीक्षा में लगभग 4.54 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए। अधिकारियों ने बताया कि शिकायतें केवल कुछ केंद्रों तक ही सीमित थीं और पर्यवेक्षकों के निर्धारित प्रक्रिया स्पष्ट किये जाने के बाद बाकी जगह परीक्षा सामान्य रूप से संपन्न हुई। विपक्ष के नेता आर अशोक ने कांग्रेस सरकार पर प्रशासनिक विफलता का आरोप लगाया और श्री खरगे के इस्तीफे, प्रभावित केंद्र पर परीक्षा रद्द करने, संबंधित अभ्यर्थियों के लिए नये सिरे से परीक्षा आयोजित करने और स्वतंत्र जांच की मांग की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हावेरी और हासन जिलों से भी ऐसी ही अनियमितताओं की खबरें आयी हैं।
विपक्ष की मांग को खारिज करते हुए खरगे ने सवाल उठाया कि पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती घोटाले के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई और तत्कालीन गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंद्र सहित भाजपा नेताओं ने इस्तीफा क्यों नहीं दिया था। खरगे ने विवाद को तूल न देने का प्रयास करते हुए कहा कि लाखों अभ्यर्थियों के शामिल होने के बावजूद केवल 120 के करीब अभ्यर्थियों ने ही आपत्तियां जतायी थीं। इन बयानों ने भर्ती प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद को और तेज कर दिया है, जहां विपक्ष ने गृह मंत्री पर अभ्यर्थियों के प्रति संवेदनहीन होने का आरोप लगाया है और नये सिरे से जांच की मांग की है।

Comment List