राहुल गांधी का केंद्र पर हमला: बोले-बड़े पदों पर कमजोर वर्ग की हिस्सेदारी हो सुनिश्चित, दलित और आदिवासी कर्मचारियों के साथ भेदभाव करने का लगाया आरोप
आरक्षण और भागीदारी: राहुल गांधी ने संस्थानों में भेदभाव पर उठाए सवाल
लोकसभा विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संस्थानों में बहुजन समाज की कम भागीदारी पर चिंता जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मेरिट और प्रदर्शन के बहाने दलित-आदिवासी कर्मचारियों की पदोन्नति रोकी जाती है। राहुल ने आरक्षण से आगे बढ़कर नीतिगत सुधारों की मांग की है ताकि उच्च पदों पर पिछड़े वर्गों को समान हक मिल सके।
नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि देश के संस्थानों में बहुजन समाज की बड़े पदों पर हिस्सेदारी कम है और उनकी उचित भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए आरक्षण से आगे बढ़कर नीतिगत सुधार किए जाने चाहिए। राहुल गांधी ने सोमवार को सोशल मीड़िया एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उनसे मिलने जब भी किसी संस्थान या संगठन के लोग आते हैं तो सबकी शिकायत यही रहती है कि उनके संस्थान में वरिष्ठ पदों पर कमजोर वर्ग के लोगों की हिस्सेदारी नहीं के बराबर है।
उन्होंने कहा, "हाल ही में जनसंसद में ग्रामीण बैंक के एससी-एसटी वेलफेयर एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान भी यह बात सामने आई कि प्रोन्नति में रोस्टर नियम होने के बावजूद दलित और आदिवासी कर्मचारियों के साथ भेदभाव किया जाता है। कभी प्रदर्शन तो कभी मेरिट के नाम पर उनकी तरक्की रोकी जाती है, जबकि आवाज उठाने पर दूरदराज क्षेत्रों में तबादले जैसी कार्रवाई भी की जाती है।"
राहुल गांधी ने कहा कि आरक्षण के चलते इन समुदायों को प्रारंभिक स्तर पर नौकरियां तो मिल जाती हैं, लेकिन उच्च पदों तक पहुंचना नीतिगत भेदभाव के कारण लगभग असंभव बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस अन्याय के खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा ताकि हर वर्ग को संस्थाओं में समान भागीदारी मिल सके।

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