RBI रिपोर्ट : भारत का विदेशी कर्ज 72 लाख करोड़ पहुंचा, निजी कंपनियों की उधारी बढ़ी
विदेशी कर्ज जीडीपी का 20.8 प्रतिशत
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2026 के अंत तक भारत का कुल विदेशी कर्ज बढ़कर 762.8 अरब डॉलर (करीब 72.15 लाख करोड़ रुपये) हो गया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में 26.3 अरब डॉलर अधिक है। हालांकि आरबीआई का कहना है कि अमेरिकी डॉलर की मजबूती के कारण विदेशी कर्ज में वास्तविक बढ़ोतरी पूरी तरह आंकड़ों में दिखाई नहीं दे रही है। यदि विनिमय दर (वैल्यूएशन) के प्रभाव को अलग कर दिया जाए, तो विदेशी कर्ज में वृद्धि करीब 51 अरब डॉलर होती।
रिपोर्ट के मुताबिक भारत का विदेशी कर्ज अब सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 20.8 प्रतिशत हो गया है, जबकि एक वर्ष पहले यह 19.8 प्रतिशत था। इससे स्पष्ट है कि आर्थिक विकास के साथ-साथ बाहरी उधारी का स्तर भी बढ़ा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह अनुपात अभी भी कई अन्य उभरती और विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में नियंत्रित स्थिति में है।
आरबीआई ने यह भी बताया कि विदेशी कर्ज में बढ़ोतरी का प्रमुख कारण निजी क्षेत्र की बढ़ती उधारी है। दूसरी ओर केंद्र सरकार का विदेशी कर्ज घटा है। गैर-वित्तीय कॉरपोरेट कंपनियों की हिस्सेदारी कुल विदेशी कर्ज में 36.4 प्रतिशत है। विदेशी बाजारों से अपेक्षाकृत कम लागत पर पूंजी उपलब्ध होने के कारण कंपनियां बाहरी स्रोतों से अधिक कर्ज ले रही हैं।

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