अब लकवाग्रस्त भी चल सकेंगे? इस रोबोटिक सूट ने जगाई नई उम्मीद
जिन पैरों ने चलना छोड़ दिया था, उन्हें रोबोट ने फिर दी गति
नई दिल्ली। विज्ञान और तकनीक की तरक्की लकवे से जूझ रहे लोगों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है। रीढ़ की हड्डी में चोट लगने के कारण 10 साल तक बिस्तर पर रहने वाली जेसिका टाविल दोबारा अपने पैरों पर खड़ी हुईं और चलकर दिखाया। इसमें रोबोटिक एक्सोस्केलेटन तकनीक ने अहम भूमिका निभाई। यह तकनीक उन लोगों की गतिशीलता बढ़ाने में मदद कर सकती है, जिनके शरीर के निचले हिस्से पर लकवे का असर है।
रोबोटिक एक्सोस्केलेटन एक विशेष प्रकार का पहनने योग्य यांत्रिक ढांचा है, जिसे शरीर के साथ लगाया जाता है। इसमें मोटर, सेंसर और कंप्यूटर आधारित नियंत्रण प्रणाली होती है, जो खड़े होने, कदम बढ़ाने और संतुलन बनाए रखने में सहायता करती है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से लैस ऐसी प्रणालियां उपयोगकर्ता की गतिविधियों के अनुरूप काम कर सकती हैं। हालांकि, इनके इस्तेमाल के लिए प्रशिक्षण और चिकित्सकीय निगरानी जरूरी होती है।
वेंडरक्राफ्ट कंपनी ने ‘ईव एक्सोस्केलेटन’ नाम का रोबोटिक सूट विकसित किया है। कंपनी के अनुसार, इसका उद्देश्य रीढ़ की हड्डी में चोट के कारण चलने में असमर्थ लोगों को अधिक स्वतंत्र बनाना है। इसकी मदद से खाना बनाने और शौचालय जाने जैसे रोजमर्रा के काम आसान बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे उपकरणों की वास्तविक उपयोगिता व्यक्ति की शारीरिक स्थिति और उपलब्ध सुविधाओं पर निर्भर करती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनियाभर में करीब 1.5 करोड़ लोग रीढ़ की हड्डी में चोट के साथ जीवन बिता रहे हैं। ऐसी चोटें चलने-फिरने और दैनिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं। रोबोटिक एक्सोस्केलेटन जैसी तकनीक पुनर्वास के नए रास्ते खोल रही है, हालांकि यह हर मरीज के लिए लकवे का स्थायी इलाज नहीं है।

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