प्रधानमंत्री एक रैली में 100 करोड़ कर रहे खर्च : प्रधानमंत्री बिहार में 200 से अधिक रैली एवं जनसभा कर चुके, तेजस्वी ने कहा- जनता की पॉकेट मारने वाले को पॉकेटमार ही कहा जाता है

जेब से हजारों करोड़ रुपए निकलवाने वालों को आप क्या कहेंगे?

प्रधानमंत्री एक रैली में 100 करोड़ कर रहे खर्च : प्रधानमंत्री बिहार में 200 से अधिक रैली एवं जनसभा कर चुके, तेजस्वी ने कहा- जनता की पॉकेट मारने वाले को पॉकेटमार ही कहा जाता है
बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हमला करते हुए कहा कि मोदी अपनी एक रैली में 100 करोड़ रुपए खर्च कर रहे हैं

पटना। बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हमला करते हुए कहा कि मोदी अपनी एक रैली में 100 करोड़ रुपए खर्च कर रहे हैं। यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बिहार के दौरे को लेकर सवाल खड़ा किया है। उन्होंने कहा है कि मोदी सरकारी राशि से अपनी एक रैली में 100 करोड़ रूपए खर्च कर रहे हैं। यादव ने शनिवार को एक्स पर लिखा कि "सरकारी खर्चे से यानी जनता की पॉकेट से प्रधानमंत्री की एक रैली का खर्चा 100 करोड़ रूपए है। उन्होंने कहा पिछले 5 चुनावों में प्रधानमंत्री बिहार में 200 से अधिक रैली एवं जनसभा कर चुके है। इसलिए जनता की जेब से निकला कुल खर्च 20 हजार करोड़ है। जीं हां 20 हजार करोड़!!!!!!!

नेता प्रतिपक्ष ने कटाक्ष करते हुए कहा कि आयोजन का बहाना है सरकारी लेकिन प्रयोजन है प्रचार चुनावी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी कार्यक्रम में प्रधानमंत्री केंद्र की 11 वर्षों एवं बिहार की 20 वर्षों की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार की उपलब्धियों एवं खामियों इत्यादि का ज़िक्र ना कर के केवल विपक्ष को गाली देने के लिए बिहार आते है तथा एक कार्यक्रम पर जनता की जेब से 100 करोड़ रुपए खर्च निकलवाते है। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि चालाकी से अपने प्रचार-प्रसार और चेहरा चमकाने के लिए जनता की जेब से हजारों करोड़ रुपए निकलवाने वालों को आप क्या कहेंगे?

यादव ने मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि बिहार जैसे गरीब राज्य को कुछ दे नहीं सकते तो लेते भी क्यूं हो? उन्होंने कहा कि रैलियों के माध्यम से बिहार की जनता का 20 हजार करोड़ लूटने और लुटाने वाले गुनहगार ऊपर से ईमानदार, तारणहार और खेवनहार बनने का नाटक रच रहे है? और हाँ! जनता की पॉकेट मारने वाले को पॉकेटमार ही कहा जाता है, मददगार नहीं।

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