पंजाब में 'आप' सरकार के भ्रष्टाचार का खेल खत्म होने का समय: सुनील जाखड़

समयबद्ध जांच की मांग

पंजाब में 'आप' सरकार के भ्रष्टाचार का खेल खत्म होने का समय: सुनील जाखड़
पंजाब भाजपा के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने आम आदमी पार्टी सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई जांच के आदेश के बाद 'आप' नेताओं द्वारा सवाल उठाना अनुचित है और राज्य को लूट से मुक्त कराने का समय आ गया है।

चंडीगढ़। पंजाब प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने बुधवार को आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर निशाना साधते हुए कहा कि अब सरकार के कथित भ्रष्टाचार का खेल खत्म होने का समय आ गया है और राज्य को कथित लूट से मुक्त कराने की जरूरत है।

सुनील जाखड़ ने आज यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान और आप नेताओं द्वारा केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की कार्रवाई पर सवाल उठाना उचित नहीं है, क्योंकि यह कार्रवाई पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश पर हुई है। उच्च न्यायालय ने पांच अक्टूबर को पंजाब सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले की जांच सीबीआई को सौंपते हुए दो महीने में स्थिति रिपोर्ट पेश करने को कहा था। उन्होंने कहा कि केंद्रीय एजेंसियों ने राज्य सरकार को कथित भ्रष्टाचार के मामलों की जांच स्वयं करने के कई अवसर दिये, लेकिन पंजाब पुलिस और सतर्कता ब्यूरो द्वारा निष्पक्ष जांच की जाती तो यह स्थिति पैदा नहीं होती।

उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप जांच निर्धारित समयसीमा में पूरी हो और सीबीआई को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराये जायें, ताकि मामले के सभी तथ्य सामने आ सकें। उन्होंने पिछले करीब डेढ़ वर्ष की घटनाओं का जिक्र करते हुए पंजाब सरकार पर सरकारी खजाने के कथित दुरुपयोग के आरोप लगाये। उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े अधिकारियों तथा तबादलों और नियुक्तियों से संबंधित आरोपों की भी जांच तेज करने की मांग की।

सुनील जाखड़ ने पांच करोड़ रुपये के कथित रिश्वत मामले में कार्रवाई की गति पर भी सवाल उठाया और डीआईजी भुल्लर से जुड़े मामले की जांच तेज करने तथा कथित डायरी में जिन लोगों के नाम हैं, उनके खिलाफ तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि ईमानदार अधिकारियों को डरने की जरूरत नहीं है, लेकिन यदि जांच में किसी की भूमिका सामने आती है तो उसे कानून के अनुसार परिणाम भुगतना होगा।

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