"नहरें सूखी, किसान परेशान" पंजाब में बिजली और सिंचाई संकट पर बवाल: कांग्रेस ने मान सरकार को घेरा, राज्यव्यापी आंदोलन की दी चेतावनी
मान सरकार पर कांग्रेस का तीखा हमला
मोहाली। पंजाब के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता बलबीर सिंह सिद्धू ने मंगलवार को राज्य में गहराते बिजली और सिंचाई संकट को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है, जिसके कारण किसान और आम लोग गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं। सिद्धू ने कहा कि धान की रोपाई के सबसे महत्वपूर्ण समय में किसानों के खेतों तक न तो नहरों का पानी पहुंच रहा है और न ही पर्याप्त बिजली मिल रही है। इसके कारण हजारों एकड़ फसल प्रभावित हो रही है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान लगातार दावा करते रहे हैं कि नहरों का पानी अंतिम छोर (टेल) तक पहुंच चुका है, लेकिन वास्तविक स्थिति इसके विपरीत है। नहरों के अंतिम छोर और छोटी नहरें सूखी पड़ी हैं तथा किसान पानी की एक-एक बूंद के लिए भटक रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि किसान अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही। सरकार के दावे केवल विज्ञापनों और कागजों तक सीमित रह गये हैं।
कांग्रेस नेता ने कहा कि बदलाव का वादा करने वाली आप सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है। पूरे पंजाब में शहरों और गांवों में कई-कई घंटे की अघोषित बिजली कटौती से लोगों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है। सिद्धू ने चुनावी वादों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने किसानों से समय पर बिजली उपलब्ध कराने के बड़े दावे किये थे, लेकिन आज हालात इसके बिल्कुल उलट हैं। उन्होंने इसे पंजाब के अन्नदाता के साथ विश्वासघात करार दिया। उन्होंने कहा कि बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण किसान अपनी धान की फसल बचाने के लिए दिन-रात डीजल जनरेटर चलाने को मजबूर हैं। एक हाई-पावर ट्यूबवेल या मोटर चलाने के लिए प्रतिदिन 60 से 70 लीटर डीजल खर्च हो रहा है, जिससे किसानों पर रोजाना लगभग 5,000 से 7,000 रुपये तक का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। इससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर होती जा रही है।
सिद्धू ने कहा कि सरकार की नाकामी का असर केवल किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापारी, दुकानदार, उद्योगपति और आम नागरिक भी लंबे बिजली कटों से परेशान हैं। भीषण गर्मी में उद्योगों का काम प्रभावित हो रहा है, छोटे कारोबार ठप पड़ रहे हैं, अस्पतालों में मरीजों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और घरों में बच्चे, महिलाएं तथा बुजुर्ग भी परेशान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब के लोगों के टैक्स का करोड़ों रुपये अन्य राज्यों में चुनाव प्रचार और सरकारी विज्ञापनों पर खर्च किया जा रहा है, जबकि राज्य के बिजली और सिंचाई ढांचे को मजबूत करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाये गये।
सिद्धू ने मांग की कि बिजली विभाग तत्काल अघोषित बिजली कटौती बंद कर कृषि एवं घरेलू उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करे। साथ ही सिंचाई विभाग को निर्देश दिये जायें कि नहरों के अंतिम छोर तक तुरंत पानी पहुंचाया जाये, ताकि किसानों की धान की फसल को बचाया जा सके।उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो पंजाब कांग्रेस पूरे राज्य में आंदोलन करेगी तथा बिजली ग्रिडों, सिंचाई विभाग के कार्यालयों और अन्य सरकारी दफ्तरों का घेराव करेगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी पंजाब सरकार की होगी।

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