वियतनाम राष्ट्रपति टो लैम का तीन दिवसीय भारत दौरा: पीएम और राष्ट्रपति से करेंगे मुलाकात, रणनीतिक संबंधों की मजबूती सहित अन्य मुद्दों पर होगी चर्चा

वियतनाम के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद यह पहली भारत यात्रा

वियतनाम राष्ट्रपति टो लैम का तीन दिवसीय भारत दौरा: पीएम और राष्ट्रपति से करेंगे मुलाकात, रणनीतिक संबंधों की मजबूती सहित अन्य मुद्दों पर होगी चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर वियतनाम के राष्ट्रपति टो लैम तीन दिवसीय भारत यात्रा पर पहुंच रहे हैं। अपनी यात्रा की शुरुआत बोधगया से करते हुए, वह रक्षा, व्यापार और प्रौद्योगिकी में 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' को मजबूत करेंगे। यह दौरा भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' और द्विपक्षीय संबंधों के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

नई दिल्ली। वियतनाम के राष्ट्रपति टो लैम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर मंगलवार को भारत पहुंचेंगे। वियतनाम की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के महासचिव टो लैम भारत की तीन दिवसीय यात्रा पर रहेंगे। उनकी इस यात्रा का उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों में नयी ऊर्जा भरना और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के नये रास्तों को तलाशना है। राष्ट्रपति टो लैम आज गया (बिहार) पहुंचेंगे। अप्रैल में वियतनाम के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देश अपनी 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' के एक दशक पूरे कर रहे हैं।

उनके साथ मंत्रियों, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और एक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल सहित एक उच्च स्तरीय दल भी आ रहा है, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक और रणनीतिक जुड़ाव को बताता है। गया के बाद वह आज देर शाम नयी दिल्ली के लिए रवाना होंगे। वियतनामी नेता का छह मई को राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत किया जायेगा। उनके प्रधानमंत्री मोदी के साथ व्यापक चर्चा करने का कार्यक्रम है, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं के साथ-साथ प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों को भी शामिल किया जायेगा।

अपनी यात्रा के दौरान वियतनामी राष्ट्रपति भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा भारत के अन्य वरिष्ठ नेताओं के भी उनसे भेंट करने की संभावना है। राष्ट्रपति टो लैम बोधगया और मुंबई की यात्रा भी करेंगे। भारत और वियतनाम के बीच दीर्घकालिक ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंध हैं। इनकी जड़ें उपनिवेशवाद विरोधी साझा संघर्षों में निहित हैं। 1972 से दशकों के कूटनीतिक जुड़ाव ने इन रिश्तों को और मजबूती प्रदान की है। प्रधानमंत्री मोदी की 2016 में वियतनाम यात्रा के दौरान इन संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' के स्तर पर ले जाया गया था और यह रिश्ता 'शांति, समृद्धि और जनता के लिए 2020 के साझा विजन' से संबंधित है। वियतनाम भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' में प्रमुख भागीदार है। वर्तमान में यह भारत का 15वां सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार और आसियान देशों में चौथा सबसे बड़ा भागीदार है।

पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा और सांस्कृतिक क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों का विस्तार हुआ है। 2025-2026 में दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग 16 अरब अमेरिकी डॉलर (1,524.8 अरब रुपये) रहा है, जिसमें ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ रहा है। नियमित विचार-विमर्श, संयुक्त अभ्यास और क्षमता निर्माण की पहल के माध्यम से रक्षा और सुरक्षा सहयोग भी गहरा हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टो लैम को वियतनाम के राष्ट्रपति के रूप में चुने जाने पर हार्दिक बधाई दी थी। उन्होंने यह भी कहा था कि भारत और वियतनाम के बीच समय की कसौटी पर खरी उतरी यह दोस्ती लगातार और अधिक मजबूत होती रहेगी। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि वह दोनों देशों और इस क्षेत्र के लोगों की प्रगति एवं समृद्धि के लिए 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' को और गहरा करने की दिशा में मिलकर काम करने के प्रति आशान्वित हैं।

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