ऑटो वालों की मराठी पर बढ़ा समय : संजय राउत ने फडणवीस पर साधा निशाना, बोले - दिल्ली के आगे झुकी सरकार
भाषा सीखना केवल राजनीतिक बातचीत का मुद्दा नहीं
मुंबई। सत्तारूढ़ सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों को मराठी सीखने के लिए एक वर्ष की अतिरिक्त समय-सीमा दिए जाने के बाद राज्य सरकार ने महाराष्ट्र के गौरव से समझौता कर केन्द्र सरकार के सामने समर्पण कर दिया है। राउत ने मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए दावा किया कि सार्वजनिक परिवहन संचालकों के लिए स्थानीय भाषा को जरूरी बनाने की शुरुआती कोशिश को केंद्रीय गृह मंत्री अमित के निर्देशों के कारण कचरे में डाल दिया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और केंद्रीय भाजपा नेतृत्व पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि बालासाहेब ठाकरे की विरासत का दावा करने वाले नेता नीति में की गई इस ढील पर चुप क्यों हैं।
राउत ने कहा, स्थानीय भाषा सीखना केवल राजनीतिक बातचीत का मुद्दा नहीं है। यह सीधे महाराष्ट्र के आत्म-सम्मान और पहचान से जुड़ा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य में रोजी-रोटी कमाने वाले किसी भी व्यक्ति को -कॉर्पोरेट अधिकारियों से लेकर हर दिन परिवहन में काम करने वाले मजदूरों तक-व्यावहारिक मराठी आनी ही चाहिए, क्योंकि उनका जनता से सीधा संपर्क होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार विस्तार देना स्थानीय हितों की कीमत पर गैर-मराठी बोलने वालों को खुश करने का एक जानबूझकर किया गया कदम था।
शिवसेना (यूबीटी) नेता ने गठबंधन के अंदर के बदलती और स्थानीय राजनीति पर ध्यान देते हुए शिंदे गुट की वित्तीय ईमानदारी की भी तीखी आलोचना की। यह दावा करते हुए कि इस गुट का इतिहास राजनीतिक खरीद-फरोख्त से दागदार है। उन्होंने मुंबई में आने वाले मेयर पद की दौड़ के आसपास बड़े पैमाने पर पैसे के लेन-देन का आरोप लगाया। राउत ने आरोप लगाया, मैं फिलहाल यह पता लगा रहा हूं कि 15 महीने के संक्षिप्त महापौर कार्यकाल को सुनिश्चित करने के लिए 1.25 अरब रुपये का लेन-देन हुआ था या नहीं।Þ इस आरोप के साथ उन्होंने राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया।

Comment List