निकाय चुनाव में भाजपा फंसी तुष्टीकरण के भंवर में, कांग्रेस बोली- गंदी व दोहरी राजनीति
सामान्य और ओबीसी वर्ग से शुल्क लिया
उदयपुर। बरसों तक कांग्रेस पर तुष्टीकरण के आरोप लगाने वाली भाजपा खुद निकाय चुनाव में तुष्टिकरण के भंवर में फंस गई है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा ने निकाय चुनाव में टिकट की दावेदारी के लिए आवेदन प्रक्रिया को सशुल्क रखा है, लेकिन मुस्लिम बहुल वार्डों से सामने आए दावेदारों से आवेदन शुल्क नहीं लिया गया। मुस्लिम दावेदारों से शुल्क नहीं लेना भाजपा की दोहरी नीति को दर्शाताहै। कांग्रेस ने कई दावेदारों के उदाहरण सामने रखते हुए दावा किया कि इन लोगों से आवेदन शुल्क नहीं लिया गया। भाजपा ने निकाय चुनाव में दावेदारी के लिए शुल्क लेने का निर्णय किया और दावेदारों से फॉर्म शुल्क के रूप में यह लिया जा रहा है। सामान्य व ओबीसी वर्ग के दावेदारों से 5000, एसटी से 3000 रुपए फॉर्म शुल्क वसूला गया। भाजपा नेताओं का कहना है कि कई दावेदार जीताऊ है, लेकिन उनके पास चुनावी खर्च नहीं है।
इनका कहना है..
मुझे इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। पता कर के ही बता पाऊंगा।वैसे सभी के लिए शुल्क का प्रावधान किया गया है।
गजपालसिंह राठौड़, भाजपा जिलाध्यक्ष
कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति करने वाले खुद इसे प्राथमिकता दे रहे हैं। अब इनके आरोपों का क्या आधार है।
फतहसिंह राठौड़, कांग्रेस शहर जिलाध्यक्ष
सिर्फ एक वर्ग के दावेदारों को आवेदन शुल्क में छूट दी गई है जिसका भाजपा को इसका स्पष्ट कारण बताना चाहिए। यह भाजपा की दोहरी नीति को दशार्ता है।
रघुवीरसिंह मीणा, कांग्रेस देहात जिलाध्यक्ष
मैंने वार्ड 20 से भाजपा में दावेदारी जताई है। दावेदारी आवेदन में मुझसे किसी तरह का शुल्क नहीं लिया गया।

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