चिदंबरम के बयान पर सुधांशु त्रिवेदी का पलटवार, बोले- सिर्फ 24 घंटे में ही सामने आ गया किसके दिमाग में हैं ‘नक्सल’

नक्सलवाद को कांग्रेस सरकारें खत्म करने में नाकाम

चिदंबरम के बयान पर सुधांशु त्रिवेदी का पलटवार, बोले- सिर्फ 24 घंटे में ही सामने आ गया किसके दिमाग में हैं ‘नक्सल’
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण का हवाला देते हुए पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम के बयान पर तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि संप्रग शासन में नक्सलवाद बढ़ा था, जबकि मोदी सरकार ने इस खतरे को निर्णायक रूप से नियंत्रित कर विकास की मुख्यधारा स्थापित की है।

नई दिल्ली। ‘दिमागी नक्सल’ के मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस नेता एवं पूर्व गृहमंत्री पी. चिदंबरम पर निशाना साधा और कहा है कि महज 24 घंटे में ही सामने आ गया कि किसके दिमाग में ‘नक्सल’ है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने सोमवार को पार्टी मुख्यालय में संवाददाताओं से कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ‘दिमागी नक्सल’ का महत्वपूर्ण विषय उठाया था, जो आज के संदर्भ में बेहद प्रासंगिक है।

उन्होंने चिदंबरम पर निशाना साधते हुए कहा, “हमें हैरानी इस बात की हुई कि सिर्फ़ 24 घंटे के भीतर ही, जिस व्यक्ति के मन में नक्सली विचार थे, वे खुद सामने आ गये। चिदंबरम खुद सामने आये और कहा कि उन्हें ‘दिमागी माओवादी’ होने पर गर्व है।” उन्होंने कहा कि कितनी हैरानी की बात है कि प्रधानमंत्री ने बात कही और इतनी तेज़ी से प्रतिक्रिया हुई तथा पूरे देश के सामने यह बात आ गयी कि किसके मन में माओवादी विचार पल रहे हैं, और वह खुद इस पर गर्व महसूस करने लगे।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा, “मैं कांग्रेस और चिदंबरम को बताना चाहता हूं कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 13 अप्रैल, 2006 को कहा था कि यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि नक्सली खतरा भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए अब तक का सबसे बड़ा खतरा है।” उन्होंने कहा कि जिस नक्सलवाद को कांग्रेस सरकारें खत्म करने में नाकाम रहीं, उसे मोदी के नेतृत्व में निर्णायक रूप से काबू में किया गया। त्रिवेदी ने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के शासनकाल में पशुपति से तिरुपति तक 'रेड कॉरिडोर' बन गया था, 180 से ज़्यादा ज़िले नक्सलवाद से प्रभावित थे, 2010 में दंतेवाड़ा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 75-76 जवान शहीद हुए थे, और उसके बाद राजधानी के एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में जश्न मनाया गया था। दिमागी दिवालिया हो चुके नक्सलियों के साथ ऐसा ही होता है। चिदंबरम के कार्यकाल में सीआरपीएफ के जवान शहीद हुए और वहां जश्न मनाया गया। इसी को ‘दिमागी नक्सल’ कहते हैं।

उन्होंने कहा कि संप्रग के शासनकाल में नक्सल विरोधी अभियानों में 1,913 जवान शहीद हुए। 180 ज़िले नक्सल प्रभावित हो गये थे। चिदंबरम के कार्यकाल में 5,000 से ज़्यादा बेगुनाह नागरिक मारे गये। नक्सलियों के पास 92 प्रतिशत से ज़्यादा हथियार ऐसे थे, जो पुलिस से लूटे गये थे। उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में उस इलाके में 1,800 से ज़्यादा बैंक शाखाएं खुली हैं, 1,200 से ज़्यादा एटीएम लगाये गये हैं और छह हज़ार से ज़्यादा मोबाइल फोन टावर लगाये गये हैं, ताकि वे लोग देश की मुख्यधारा के साथ विकास कर सकें। भाजपा प्रवक्ता ने बताया कि 22 लाख लोगों को आयुष्मान भारत कार्ड दिये गये हैं। जिसे यह दृश्य आपत्तिजनक लगता है, वह मानसिक नक्सली है।

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