लौह पुरुष को मोदी का नमन, बताया आत्मनिर्भर भारत का प्रेरणास्रोत

सरदार पटेल की जयंती पर मोदी का संदेश

लौह पुरुष को मोदी का नमन, बताया आत्मनिर्भर भारत का प्रेरणास्रोत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर उन्हें नमन करते हुए अखंड भारत के निर्माण में उनके ऐतिहासिक योगदान को याद किया। मोदी ने पटेल को लौह पुरुष बताते हुए कहा कि उनका त्याग, समर्पण और दूरदृष्टि विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की प्रेरणा है। पटेल ने 560 से अधिक रियासतों का भारतीय संघ में विलय कराया था।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने देश के पहले उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को भारत की एकता के सूत्रधार और एक महान नेता के रूप में याद किया जिनके समर्पण, बलिदान और राष्ट्र-निर्माण के प्रति संकल्प ने देश को विकास एवं आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढऩे के लिए प्रेरित करना जारी रखा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक संदेश में, मोदी ने पटेल को देश का 'लौह पुरुष' और अखंड भारत के दृष्टिकोण का अग्रदूत बताया। साथ ही, एक मजबूत, समृद्ध एवं सक्षम राष्ट्र के निर्माण में उनके जीवन योगदान के लिए उन्हें श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री ने कहा, अखंड भारत के निर्माता और देश के 'लौह पुरुष' सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर मैं उन्हें सादर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। उन्होंने आगे कहा कि मातृभूमि की सेवा में सरदार पटेल का बलिदान और अटूट समर्पण, एक विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के सामूहिक संकल्प के लिए हमेशा प्रेरणा के स्रोत बने रहेंगे।

सरदार पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को हुआ था। वह भारत के स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेताओं में से एक थे और उन्होंने आजादी के बाद देश के राजनीतिक एकीकरण में अहम भूमिका निभाई। स्वतंत्र भारत के पहले उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के रूप में, उन्होंने 560 से अधिक रियासतों को भारतीय संघ में शामिल करने का नेतृत्व किया। यह एक ऐतिहासिक कार्य था जिसने भारत की क्षेत्रीय एवं राजनीतिक एकता की नींव रखी। भारत के'लौह पुरुष' के रूप में विख्यात पटेल के राष्ट्रीय एकीकरण में योगदान, उनकी प्रशासनिक दूर²ष्टि और नए स्वतंत्र देश के सामने आई चुनौतियों से निपटने में उनके दृढ़ संकल्प ने भारत के राजनीतिक इतिहास में उनके लिए एक स्थायी स्थान बना दिया।

देश के इतिहास के एक नाजुक मोड़ पर रियासतों को एक साथ लाने के उनके प्रयास भारतीय संघ को एकजुट करने में विशेष रूप से महत्वपूर्ण थे। 31 अक्टूबर को उनकी जयंती को 'राष्ट्रीय एकता दिवस' के रूप में मनाया जाता है। यह दिन सरदार पटेल की जयंती मनाने और भारत की एकता, अखंडता तथा राष्ट्र-निर्माण में उनके योगदान का सम्मान करने के लिए है। यह अवसर एक अखंड भारत के उनके दृष्टिकोण और देश की राष्ट्रीय एकता को बनाए रखने के महत्व की भी याद दिलाता है।

 

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