ममता की सुरक्षा पर सियासी संग्राम : 2 PSO हटने से बंगाल में बवाल, TMC ने उठाए सियासी सवाल

बनर्जी के सुरक्षा इंतजामात पर जताई चिंता

ममता की सुरक्षा पर सियासी संग्राम : 2 PSO हटने से बंगाल में बवाल, TMC ने उठाए सियासी सवाल
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के दो निजी सुरक्षा अधिकारियों (पीएसओ) को अचानक हटाए जाने पर विवाद गहरा गया है। टीएमसी सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने इसे राजनीतिक कदम बताते हुए सुरक्षा में सेंध की आशंका जताई। वहीं राज्य प्रशासन ने आरोपों को खारिज कर कहा कि यह नियमित सुरक्षा रोटेशन प्रक्रिया है और ममता की जेड श्रेणी सुरक्षा पूरी तरह बरकरार है।

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा में तैनात दो निजी सुरक्षा अधिकारियों (पीएसओ) को सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत अचानक हटाए जाने के बाद राज्य में राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। राज्य प्रशासन के अनुसार सुरक्षा अधिकारियों को रोटेशनल तरीके से तैनात किया जाता है ताकि सुरक्षा से जुड़ी कोई भी संवेदनशील जानकारी लीक न हो लेकिन तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राज्यसभा सदस्य डेरेक ओ'ब्रायन के इस आरोप के बाद इस मुद्दे ने राजनीतिक मोड़ ले लिया कि यह बदलाव राजनीति से प्रेरित है। ओ ब्रायन ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाए और बनर्जी के सुरक्षा इंतजामात पर चिंता जताई।

उन्होंने लिखा, यह अचानक बदलाव क्यों किया गया? क्या भवानीपुर चुनाव नतीजे से जुड़े मामले की वजह से ऐसा किया गया है? क्या इसलिए कि उन्होंने बुधवार को फेरीवालों को हटाने के खिलाफ एक विरोध-मार्च का नेतृत्व किया था? आखिर यह सब क्या हो रहा है? यह विवाद बुधवार रात उस समय शुरू हुआ, जब ओ'ब्रायन ने बनर्जी के कालीघाट घर के बाहर से सोशल मीडिया पर लाइव दिखाया और दावा किया कि गेट पर कोई सुरक्षा कर्मी नहीं था।

उन्होंने आरोप लगाया कि कोई भी व्यक्ति बिना रोक टोक के परिसर में प्रवेश कर सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि बनर्जी की सुरक्षा में तैनात उनके दो विश्वसनीय निजी सुरक्षा अधिकारी स्वरूप गोस्वामी और कुसुम कुमार द्विवेदी को पुलिस ने अचानक हटा दिया है। ओ ब्रायन का यह लाइव वीडियो तेजी से वायरल हो गया और राजनीतिक अटकलों को जन्म देने लगा कि क्या पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था में कटौती कर दी गई है। नबन्ना के शीर्ष अधिकारियों ने ऐसे दावों को खारिज करते हुए कहा कि बनर्जी की सुरक्षा में लगी कर्मी को वापस नहीं बुलाया गया है। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक उनकी जेड कैटेगरी सुरक्षा बरकरार है और उनके घर के आसपास सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है।

अधिकारियों ने कहा कि यह मामला सिर्फ निजी सुरक्षा अधिकारियों की तैनाती से जुड़ा है और इस बात पर जोर दिया कि अधिकारियों को सरकारी ड्यूटी रोस्टर और सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार तैनात किया जाता है। आधिकारिक सुरक्षा कार्य में निजी पसंद का कोई प्रावधान नहीं है। नबन्ना के मुताबिक बनर्जी ने अपनी पसंद बताई थी कि स्वरूप गोस्वामी और कुसुम कुमार द्विवेदी उनके निजी सुरक्षा अधिकारी बने रहें। अधिकारियों ने हालांकि कहा कि प्रशासनिक नियम निजी पसंद के आधार पर सुरक्षा तैनाती की इजाजत नहीं देते हैं। पुलिस सूत्रों ने यह भी दावा किया कि कल बनर्जी के नेतृत्व में हुए विरोध-मार्च के बारे में प्रशासन को आधिकारिक रूप से नहीं बताया गया था। इसके बावजूद पुलिस को जानकारी मिलते ही तुरंत सुरक्षा के पुख्ता इंतजामात किए गए।

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