शंकराचार्य ने दाखिल की अग्रिम जमानत याचिका : शीघ्र सुनवाई होने की संभावना, बोले- पुलिस ने पहले क्यों नहीं दर्ज किया मुकदमा
जिला अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया था
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर दर्ज यौन उत्पीड़न मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल, जल्द सुनवाई संभव। कोर्ट के आदेश पर झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज। स्वामी ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। आरोप लगाने के लिए आर्थिक प्रलोभन दिया गया था।
प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न के मामले में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की गई है। याचिका पर शीघ्र सुनवाई होने की संभावना है। गौरतलब है कि तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने जिला अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। इस पर रेप एवं पॉक्सो स्पेशल कोर्ट विनोद कुमार चौरसिया ने झूंसी थाने की पुलिस को मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया था। इसके बाद झूंसी थाना पुलिस ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी तथा दो-तीन अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
पुलिस ने पहले क्यों नहीं दर्ज किया मुकदमा: अविमुक्तेश्वरानंद
इस बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी नाबालिग ने आरोप लगाया था तो पुलिस ने पहले पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज क्यों नहीं किया। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि मौनी अमावस्या जैसे पर्व पर, जब भारी भीड़ होती है, ऐसे गंभीर आरोप लगाना संदेह पैदा करता है। स्वामी ने कहा कि वे दिनभर मीडिया कैमरों के सामने मौजूद थे और कोई साक्ष्य नहीं मिलने के कारण पुलिस ने प्रारंभ में मामला दर्ज नहीं किया। बाद में नया मामला यौन उत्पीड़न का सामने लाया गया। उन्होंने प्रश्न उठाया कि यदि कोई लड़का आरोप लगा रहा था तो उसी दिन पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर मेडिकल परीक्षण क्यों नहीं कराया गया। उनका कहना था कि अदालत के आदेश के बाद ही प्राथमिकी दर्ज की गई।
शंकराचार्य की शरण में आया आरोप लगाने वाला- स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अपनी छोटी बच्ची के यौन शोषण के आरोप में फंसाने के लिए आशुतोष पाण्डेय ने जिस व्यक्ति को आर्थिक सहयोग का प्रलोभन दिया था, वह व्यक्ति सोमवार को शंकराचार्य जी की शरण में आया और पूरी सच्चाई उजागर की। शाहजहांपुर निवासी पत्रकार रमाशंकर दीक्षित ने शाम को केदारघाट स्थित विद्या मठ में पहुंचकर पत्रकारों के समक्ष बताया कि हिस्ट्रीशीटर आशुतोष पाण्डेय ने अपने सहयोगी के माध्यम से फोन पर उनसे बात की और कहा, तुम शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर आरोप लगा दो कि उन्होंने हमारी छोटी बच्ची के साथ यौन शोषण किया था। हम तुम्हारी आर्थिक सहायता करेंगे। दीक्षित ने इस पूरी घटना को एक सादे कागज पर लिखकर अपना हस्ताक्षर किया और शंकराचार्य जी को सौंप दिया।

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