ग्लोबल वार्मिंग से तीन गुणा ज्यादा तपेगी दुनिया

हीटडोम चिंताजनक

ग्लोबल वार्मिंग से तीन गुणा ज्यादा तपेगी दुनिया
ग्लोबल वार्मिंग ने दुनियाभर में कहर ढाना शुरू कर दिया है। इसमें जलवायु परिवर्तन ने अहम भूमिका निभाई है।

ग्लोबल वार्मिंग ने दुनियाभर में कहर ढाना शुरू कर दिया है। इसमें जलवायु परिवर्तन ने अहम भूमिका निभाई है। तापमान वैश्विक औसत की तुलना में तेज गति से बढ़ रहा है। इसके चलते लम्बे समय तक चलने वाली और हीटवेव की घटनायें ज्यादा तेजी से बढ़ रही हैं।हालात इस बात के सबूत हैं कि आने वाले दिनों में तापमान दो डिग्री तक पहुंच सकता है। दुनियाभर के शोध-अध्ययन इस बात के संकेत पहले ही दे चुके हैं। अध्ययनों की मानें तो ग्लोबल वार्मिंग के चलते असीमित गर्मी की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। योरोप की भयंकर गर्मी इस बात की चेतावनी है। वह बात दीगर है कि योरोप की इस भयंकर गर्मी को 'हीटडोम' कहें, 'हीटवेव ' कहें या फिर उसे 'ओमेगा हीटवेव ' की संज्ञा दी जाये, हकीकत यह है कि योरोप भीषण गर्मी के साये में झुलस रहा है। हालात की भयावहता का सबूत यह है कि योरोप के कई देश 1970 के दशक की तुलना में दो महीने अधिक 'हीट स्ट्रेस' का भीषण असर झेल रहे हैं। इसके लिए ग्लोबल वार्मिंग और जीवाश्म ईंधन जिम्मेदार है।

हीटडोम चिंताजनक :

मौसम विभाग के अनुसार, योरोप महाद्वीप के कई हिस्सों में हीटडोम बना हुआ है, जिससे भीषण गर्मी पड़ रही है। सूरज की गर्मी हर दिन इसमें इजाफा करती है। नतीजतन बारिश और ठंडी हवायें भी राहत नहीं दे पातीं। हीटडोम चिंताजनक इसलिए भी है कि ये बहुत ही धीमी गति से आगे बढ़ते हैं। इससे लोग लम्बे समय तक गर्मी झेलने को मजबूर होते हैं। देखा जाये तो फ्रांस, इटली, ब्रिटेन, स्पेन, स्विट्ज़रलैंड, जर्मनी, मैक्सिको, बेल्जियम और नीदरलैंड में स्थिति ज्यादा भयावह है। फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन और इटली की सरकारों ने रेड अलर्ट जारी किया हुआ है। पूरे स्पेन में गर्मी का अलर्ट है। बेल्जियम और नीदरलैंड में भीषण गर्मी के चलते अभी तक 3700 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। स्थानीय अधिकारियों की मानें तो यह आंकड़े शुरूआती हैं। आने वाले दिनों में इसमें और बढ़ोतरी हो सकती है। फ्रांस में अधिकांश हिस्सों में हाई अलर्ट है। यहां 1947 के बाद यहां सबसे अधिक गर्म दिन और गर्मी इस बार देखी गयी है। यह वहां पर अभूतपूर्व स्थिति का द्योतक है। वहां हालात इतने खराब हैं कि वहां पर गर्मी से राहत पाने की कोशिश जानलेवा साबित हो रही है। इसी कोशिश में वहां जलाशयों नदियों में गये तकरीबन 40 से ज्यादा लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है। एफिल टावर के पास ट्रोकडेरो फाउंटेन में गर्मी की वजह से राहत की खातिर लोग कूदते देखे गये हैं। वहां शवों को रखने की जगह कम पड़ रही है। यही नहीं वहां घरों में रहने वालों और 45 से अधिक उम्र के लोगों के मरने की तादाद सबसे ज्यादा यानी 91 फीसदी है। बेल्जियम और नीदरलैंड में भी सबसे ज्यादा 85 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की मौतें हुयी हैं।

चुनौतियों को बढ़ा दिया :

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यह हालात की भयावहता का जीता-जागता सबूत है। इन हालातों ने स्वास्थ्य चुनौतियों को बढ़ा दिया है। परिवहन सुविधाओं पर भी काफी दबाव पड़ा है। लोग मानने लगे हैं कि अब ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को गंभीरता से लेने का समय गया है। इसमें देरी तबाही के खतरों को और बढ़ा देगी। योरोप में जानलेवा गर्मी के कहर से वहां गर्मी के रिकॉर्ड टूट सकते हैं। वैज्ञानिक इसे 'ओमेगा ब्लाक' नामक दुर्लभ मौसमी पैटर्न की संज्ञा दे रहे हैं। उनके अनुसार ओमेगा ब्लाक के चलते योरोप के कई देशों में तापमान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है। इससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। स्कूल बंद करने पड़े हैं। बिजली आपूर्ति प्रभावित हुयी है और पौल्ट्री फार्मों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। इस असामान्य गर्मी के पीछे ओमेगा ब्लाक नामक मौसमी पैटर्न जिसमें उच्च दबाव का क्षेत्र ग्रीक अक्षर 'ओमेगा' के आकार का बन जाता है। यह गर्म हवा को लम्बे समय तक एक ही इलाके में रोककर रखता है जिससे अमूमन तापमान सामान्य से 18 डिग्री सेल्सियस तक अधिक हो सकता है। फ्रांस के दक्षिण-पश्चिमी शहर पिसोस में तापमान 44.3 डिग्री को पार कर गया। उत्तर - पश्चिमी शहर ब्रिटनी में बिजली आपूर्ति ठप्प होने से हजारों लोग प्रभावित हुए।

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शोधकर्ताओं का दावा :

दरअसल, अध्ययनों ने एक साल पहले ही चेता दिया था कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण तीन गुणा असीमित गर्मी पड़ने की संभावना है जिसके कारण लोग सहने की क्षमता से काफी मात्रा में प्रभावित होंगे जिनमें युवकों की तादाद ज्यादा होगी। अध्ययन कर्ताओं ने चेतावनी दी थी कि जिस क्षेत्र में अत्याधिक गर्मी जैसे हालात होंगे, वहां वृद्ध लोगों को गर्मी से 35 फीसदी खतरा ज्यादा होगा। इनमें कम पसीना आना और धीमा रक्त सर्कुलेशन होता है। इससे वृद्ध लोगों के लिए अबतक जीवित रह पाने वाली गर्मी की सीमायें बढ़ी हैं। वहीं इससे युवा आने वाले समय में अधिक जूझते नजर आयेंगे। ऐसे में लंबे समय तक बाहर रहने वाले के अलावा छाया में रहने वाले लोग भी घातक हीटस्ट्रोक की चपेट में जायेंगे। शोधकर्ताओं का दावा है कि असहनीय गर्मी में शरीर का मुख्य तापमान छह घंटे के भीतर 47 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है। यह स्थिति खतरनाक हो सकती है। इसलिए सरकारों को अब ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को गंभीरता से लेना होगा अन्यथा मानव जीवन का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जायेगा।

-ज्ञानेन्द्र रावत

यह लेखक के अपने विचार हैं।

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