उदयपुर के पारस हॉस्पिटल से 85 लाख, डूंगरपुर के जील अस्पताल से 50 लाख रु. की होगी वसूली
जयपुर के मणिपाल, सोनी और इंडस हॉस्पिटल सहित नौ अस्पतालों से रिकवरी
जयपुर। सरकारी कर्मचारी और पेंशनर्स के कैशलेस इलाज की आरजीएचएस यानी राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम में वित्तीय एवं प्रोसेसिंग अनियमितता पर बीते तीन माह में 51 इम्पैनल अस्पतालों को योजना से तीन माह के लिए निलंबित किया गया है। इस समयावधि में वे योजना के तहत मरीज का इलाज नहीं कर सकेंगे। वहीं एक माह की अवधि की ऑडिट जांच में 24 ऐसे अस्पताल हैं जिनमें अनियमितताएं मिली, ऐसे में इस अस्पतालों पर 2करोड़ 96 लाख 48 हजार 353 रुपए का जुर्माना लगाया गया है। प्रमुख सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि योजना में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस पॉलिसी के तहत सख्त कार्रवाई की गई है। जिन अस्पतालों के ऑडिट में गडबड़ी मिली है, उनको बुलाकर उनसे इसके बारे में पूछा गया। मामलों में सुनवाई हुई। उसके बाद दस्तावेजों, साक्ष्यों के आधार पर जुर्माना लगाया गया है।
अस्पतालों में ये मिलीं अनियमितताएं :
ऑडिट एवं जांच के दौरान कई गंभीर वित्तीय एवं इलाज प्रोसेसिंग अनियमितताएं मिलीं। दस्तावेजों की डुप्लीकेसी, आवश्यकता से अधिक जांचें कराना, अधिक भुगतान लेने के लिए एक ही पैकेज में सम्मिलित सेवाओं एवं प्रक्रियाओं को अलग अलग दर्शाकर क्लेम प्रस्तुत करना, आवश्यक दस्तावेजों का अभाव तथा ओपीडी मरीजों को अनुचित रूप से आईपीडी में परिवर्तित कर क्लेम प्रस्तुत करने जैसे मामले इन अस्पतालों में सामने आए। अनियमितताओं के कारण योजना पर अनावश्यक वित्तीय भार पड़ने की पुष्टि होने के बाद रिकवरी सहित अन्य कार्रवाई की गई।
मजबूत होगा ऑडिट सिस्टम, ट्रेस होगी अनियमितताएं :
राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के सीईओ हरजीलाल अटल ने बताया कि योजना के संचालन में पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता है। ताकि राजकोष की एक-एक पाई पात्र लाभार्थियों के हित में ही व्यय हो। इसलिए ऑडिट प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। भविष्य में भी किसी भी प्रकार की फर्जी बिलिंग, अनियमित क्लेम, प्रक्रियागत उल्लंघन अथवा वित्तीय गड़बड़ी पाए जाने पर उसे तुरंत ट्रेस कर कार्रवाई होगी।

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