लाखेरी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई, रात को अस्पताल में नहीं मिलते डॉक्टर

पहले से ही चिकित्सकों की है कमी, चिकित्सा विभाग की उदासीनता से जनता बेहाल

लाखेरी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई, रात को अस्पताल में नहीं मिलते डॉक्टर

सरकारी अस्पताल में डॉक्टर नदारद रहते हैं और निजी चिकित्सक भी उपलब्ध नहीं होते, जिससे आपातकालीन स्थिति में मरीजों को तड़पते हुए दूसरे शहर ले जाना पड़ता है।

लाखेरी। लाखेरी सीएचसी में चिकित्सकों की कमी से  स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति से जनता में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। रात के समय मरीजों को इलाज तक नसीब नहीं हो पाता। सरकारी अस्पताल में डॉक्टर नदारद रहते हैं और निजी चिकित्सक भी उपलब्ध नहीं होते, जिससे आपातकालीन स्थिति में मरीजों को तड़पते हुए दूसरे शहर ले जाना पड़ता है।

रातभर भटकता रहा मरीज, लेकिन डॉक्टर नहीं मिला
तमोलखाना क्षेत्र में हाल ही में एक परिवार में मेहमान की अचानक तबीयत बिगड़ गई। परिजन तुरंत अस्पताल पहुंचे, लेकिन लाखेरी सीएचसी पर कोई डॉक्टर उपलब्ध नहीं था। उम्मीद लेकर निजी अस्पतालों में गए, लेकिन वहां भी कोई चिकित्सक नहीं मिला। आखिरकार, मरीज को दूसरे शहर ले जाना पड़ा, जिससे बहुमूल्य समय नष्ट हो गया और मरीज की हालत और भी बिगड़ गइ। 

महिला पहुंची बच्चों को दिखाने, लेकिन सरकारी डॉक्टर ने निजी अस्पताल भेज दिया
शहर में मरीजों को सरकारी अस्पताल से भी निजी चिकित्सकों के पास भेजने की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। हाल ही में एक महिला अपने बीमार बच्चों को दिखाने के लिए सरकारी अस्पताल पहुंची, लेकिन वहां मौजूद चिकित्सक ने जांच करने के बजाय उन्हें निजी चिकित्सक के पास जाने की सलाह दे दी। यह न केवल सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि सरकारी डॉक्टर मरीजों को निजी अस्पतालों की ओर भेजकर अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं। इससे गरीब और जरूरतमंद मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।

पूर्व मंत्री के भाई की जान नहीं बच सकी, फिर भी प्रशासन बेखबर
सबसे दुखद पहलू यह है कि तीन दिन पूर्व ही यहां एक पूर्व मंत्री बाबूलाल वर्मा के भाई की जान नहीं बच सकी, क्योंकि समय पर जीवन रक्षक सुविधाएं और चिकित्सक उपलब्ध नहीं थे। इतने बड़े हादसे के बाद भी प्रशासन का इस ओर ध्यान न देना शहर की जनता के लिए गहरी चिंता का विषय बन गया है। जनता का सवाल है कि अगर एक पूर्व मंत्री के परिवार को भी इलाज नहीं मिल पा रहा है, तो आम आदमी की क्या स्थिति होगी?

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दिन में डॉक्टर, लेकिन रात में भगवान ही सहारा
शहरवासियों का कहना है कि दिन में सरकारी चिकित्सक सेवाएं देते हुए मिल जाते हैं, लेकिन रात में सरकारी और निजी, दोनों तरह के डॉक्टर नदारद रहते हैं। इसका खामियाजा गंभीर मरीजों को भुगतना पड़ता है, जिनकी हालत सही समय पर इलाज न मिलने से और बिगड़ जाती है।

पूर्व चेयरमैन लक्ष्मी चंद महावर बोले प्रशासन सो रहा है, जनता ठगा महसूस कर रही
लाखेरी की चिकित्सा व्यवस्था की इस बदहाली को लेकर पूर्व चेयरमैन लक्ष्मी चंद महावर ने भी नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि इस समस्या से प्रशासन और अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा, हम खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। अगर हमारी सरकार होती, यानी कांग्रेस सरकार होती, तो जनता के साथ न्याय जरूर होता।

लोकसभा अध्यक्ष का क्षेत्र होते हुए भी जनता को इस हालात से गुजरना पड़ रहा 
क्षेत्र की जनता ने आश्चर्य और निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि यह लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का क्षेत्र होने के बावजूद भी स्वास्थ्य सुविधाएं बदहाल हैं। जनता का कहना है कि यदि इतने बड़े पद पर बैठे जनप्रतिनिधि के क्षेत्र की यह स्थिति है, तो बाकी इलाकों का क्या हाल होगा?

प्रशासन सो रहा कुंभकर्णी नींद, अब कैसे जगाए ?
लाखेरी की जनता कई बार समाचार पत्रों और मीडिया के माध्यम से प्रशासन को जगाने की कोशिश कर चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जबकि यहां पर तीन चिकित्सक लगाए गए थे, लेकिन शायद वे भी अपनी सेवाएं कागजों में ही दे रहे हों। प्रशासन को चाहिए कि इस ओर गंभीरता से ध्यान आकर्षित करे, ताकि जनता को स्वास्थ्य सेवाओं का पूरा लाभ मिल सके।

जनता की मांग, स्वास्थ्य सेवाओं में तत्काल सुधार किया जाए
शहरवासियों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से इस गंभीर मुद्दे पर तत्काल कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर जल्द ही स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार नहीं हुआ, तो जनता सड़कों पर उतरकर विरोध करेगी। अब सवाल यह उठता है क्या प्रशासन नींद से जागेगा, या फिर लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया जाएगा?

इनका कहना है 
हमने लाखेरी सीएचसी में तीन चिकित्स नियुक्त कर रखे है।  बेहरतनी सेवाएं देने की कोशिश कर रहे है। साथ ही जिन तीन चिकित्सकों ने ज्वाइन नहीं किया है उनकी जानकारी सरकार को भेजी है। 
- ओपी सामर, सीएमएचओ बूंदी 

सीएचसी में चिकित्सकों की कमी के बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया है। अस्पताल में मरीजों की राहत देने के प्रयास किए जा रहे है। 
- डॉ. वेदांती सक्सेना, लाखेरी सीएचसी प्रभारी

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