ई-डिटेक्शन से 18 लाख चालान, परिवहन विभाग के राजस्व में 13.82% की वृद्धि 35 ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक होंगे ऑटोमेटेड; मुख्य सचिव ने की प्रगति समीक्षा
ई-डिटेक्शन और ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन से आधुनिक होगी व्यवस्था
जयपुर। राजस्थान में डिजिटल नवाचार और आधुनिक तकनीक से परिवहन व्यवस्था को पारदर्शी एवं सुरक्षित बनाने की दिशा में काम तेज हो गया है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने मंगलवार को शासन सचिवालय में परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग तथा राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने लंबित परियोजनाओं को समयबद्ध पूरा करने और बजट घोषणाओं की शत-प्रतिशत पालना के निर्देश दिए। विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष में 27 सितम्बर तक 3594.73 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित किया है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से 436.45 करोड़ रुपए अधिक है।
राजस्व में 13.82 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। ई-डिटेक्शन प्रणाली के जरिए बिना वैध दस्तावेजों वाले वाहनों के करीब 18 लाख चालान जारी किए गए हैं, जिनकी राशि 1188 करोड़ रुपए है। वहीं, 57 परिवहन सेवाएं वाहन और सारथी पोर्टल पर ऑनलाइन उपलब्ध हैं। प्रदेश में 55 ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन संचालित हैं। सभी 35 ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक को स्वचालित किया जा रहा है, जिनमें 23 कार्यशील हो चुके हैं। रोडवेज बेड़े में करीब 900 नई बसें शामिल करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। राजस्थान व्हीकल स्क्रैपिंग नीति के तहत पुराने वाहन स्क्रैप कराने पर नए वाहन की खरीद में 16 से 26 प्रतिशत तक टैक्स छूट मिलेगी। सम्पर्क पोर्टल पर शिकायत निस्तारण का औसत समय भी 23 से घटकर 13 दिन रह गया है।

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