शिखर अग्रवाल पर ACB का शिकंजा, रिसॉर्ट में करोड़ों की संपत्तियों की होगी जांच
पद के दुरुपयोग और निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने के आरोप
जयपुर। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने उनके खिलाफ पद के कथित दुरुपयोग, निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने और स्वयं व परिजनों के नाम पर कम कीमत में रिसॉर्ट में विला खरीदने के आरोपों को लेकर विस्तृत जांच की तैयारी कर ली है। राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत जांच एवं अनुसंधान के लिए पूवार्नुमोदन दे दिया है। जांच के दायरे में निजी कंपनी गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक और अन्य संबंधित व्यक्ति भी शामिल होंगे। एसीबी के महानिदेशक पुलिस गोविन्द गुप्ता के अनुसार उद्योग विभाग से मिली तथ्यात्मक रिपोर्ट और गोपनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारियों का परीक्षण किया गया। इसके बाद प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर विस्तृत जांच आवश्यक मानी गई। प्रारंभिक जांच में आरोप है कि शिखर अग्रवाल ने जिला कलेक्टर उदयपुर, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अध्यक्ष और अतिरिक्त मुख्य सचिव उद्योग सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए अपने पद और प्रभाव का दुरुपयोग किया। आरोप है कि उन्होंने गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों से कथित मिलीभगत कर कंपनी को रिसॉर्ट निर्माण की शर्तों में छूट, आवश्यक प्रमाण-पत्रों की जांच के बिना स्वीकृतियां और विशेष रियायती आर्थिक पैकेज दिलवाने में भूमिका निभाई।
उदयपुर और अलवर के रिसॉर्ट में खरीदे विला जांच के घेरे में :
एसीबी की प्रारंभिक जांच में मिली जानकारी के अनुसार, उदयपुर के बुझड़ा रिसॉर्ट में अग्रवाल और उनकी पत्नी के नाम पर 10-10 विला खरीदे गए। प्रत्येक विला की कीमत करीब 15 लाख रुपए बताई गई है। वहीं, अलवर के अजबगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट में अग्रवाल और उनकी पत्नी के नाम पर 8 विला 16.5-16.5 लाख रुपए में खरीदे जाने की जानकारी है। इसके अलावा दोनों बेटों के नाम पर 4 विला करीब 15-15 लाख रुपए और सास-ससुर के नाम पर 4 विला करीब 16.5-16.5 लाख रुपए में खरीदने की बात सामने आई है। एसीबी के अनुसार, इन संपत्तियों की खरीद बाजार मूल्य की तुलना में काफी कम कीमत पर किए जाने का आरोप है।
आर्थिक पैकेज जारी होने वाले दिन ही 20 विला की रजिस्ट्री :
प्रारंभिक जांच में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड को वित्त विभाग की ओर से 27 मार्च 2026 को विशेष रियायती आर्थिक पैकेज जारी किया गया था। इसी दिन शिखर अग्रवाल की ओर से 20 विला की रजिस्ट्री करवाई गई थी। इन दोनों मामलों के बीच संभावित संबंधों की भी विस्तृत जांच की जाएगी।
आय से अधिक संपत्ति की भी होगी जांच :
एसीबी की प्रारंभिक जांच में प्रथम दृष्टया यह आशंका जताई गई है कि निजी कंपनी के संचालकों के साथ कथित मिलीभगत कर कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। इसके साथ ही स्वयं और परिजनों के नाम पर कथित आय से अधिक संपत्तियां अर्जित करने के पहलू की भी जांच की जाएगी। राज्य सरकार से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत पूवार्नुमोदन मिलने के बाद अब एसीबी शिखर अग्रवाल, गोयल फैशंस प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की विस्तृत जांच करेगी।

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