कृषि विभाग : गेहूं-जौ की नई किस्मों पर वैज्ञानिकों का मंथन, जयपुर में जुटा देश-विदेश का विशेषज्ञ समूह
उत्पादकता और गुणवत्ता बढ़ाने पर भी चर्चा
जयपुर। राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुरा में गेहूं एवं जौ अनुसंधान पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय वैज्ञानिक कार्यशाला के पहले दिन देश-विदेश के कृषि वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने फसल उत्पादन बढ़ाने की रणनीतियों पर मंथन किया। वैज्ञानिक सत्रों में फसल सुधार, जलवायु अनुकूल किस्मों, रोग-कीट प्रबंधन तथा संसाधनों के दक्ष उपयोग पर चर्चा हुई। वर्ष 2026-27 की अनुसंधान कार्ययोजना पर भी विस्तार से विचार किया गया। वैज्ञानिकों ने कम पानी और कम पोषक तत्वों में अधिक उत्पादन देने वाली किस्मों के विकास को समय की जरूरत बताया। गेहूं में नाइट्रोजन एवं पोषक तत्वों के बेहतर उपयोग तथा जौ की उत्पादकता और गुणवत्ता बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।
वैरायटी आइडेंटिफिकेशन कमेटी ने उन्नत किस्मों का उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता और रोग प्रतिरोधकता के आधार पर मूल्यांकन किया। भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल के निदेशक डॉ. रतन तिवारी ने बताया कि वर्ष 2025 में देश में रिकॉर्ड 120 मिलियन टन गेहूं उत्पादन हुआ। कल होगा औपचारिक उद्घाटन: कार्यशाला के दूसरे दिन कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा मुख्य अतिथि होंगे। आईसीएआर महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट विशिष्ट अतिथि तथा एसकेएन कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर के कुलगुरु डॉ. पुष्पेंद्र सिंह चौहान अध्यक्षता करेंगे।

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