रिश्तों का खून : कहीं पिता ने नवजात को मारा, कहीं पत्नी ने पति की जान ली
14 घंटे की नवजात से लेकर 4 साल की मासूम तक नहीं बची
जयपुर। रिश्ते, भरोसे, अपनापन और सुरक्षा का नाम हैं, लेकिन दौसा और कोटपूतली-बहरोड़ जिले से सामने आए तीन मामलों ने रिश्तों की इसी बुनियाद को झकझोर दिया है। कहीं जन्म के महज 14 घंटे बाद पिता ने अपनी नवजात बेटी की हत्या कर दी तो कहीं पति के चरित्र पर शक और घरेलू कलह ने पत्नी को ही पति की हत्या का आरोपी बना दिया। एक अन्य मामले में पिता ने अपनी दूसरी पत्नी के चार साल के मासूम बेटे को मौत के घाट उतारकर शव श्मशान घाट के पास दफना दिया। इन घटनाओं ने परिवारों में बढ़ते तनावए अविश्वास और टूटते रिश्तों की भयावह तस्वीर सामने रखी है।
14 घंटे की जिंदगी...पिता पर हत्या का आरोप :
जयपुर ग्रामीण के चंदवाजी थाना क्षेत्र में 29 जुलाई को एक नवजात बच्ची की हत्या का मामला सामने आया। पुलिस के अनुसार आरोपी रवि कुमार यादव ने जन्म के करीब 14 घंटे बाद अपनी नवजात बच्ची की हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
पति के शक ने लिया खूनी मोड़ :
दौसा जिले में पति-पत्नी के रिश्ते में शक और घरेलू कलह इतना बढ़ा कि पति राकेश की जान चली गई। पुलिस के अनुसार मृतक अपनी पत्नी के चरित्र पर संदेह करता था। इसी घरेलू विवाद के बीच आरोपी ममता ने विधि से संघर्षरत किशोर के साथ मिलकर शराब के नशे में राकेश के सिर पर पत्थर से वार कर उसकी हत्या कर दी। सदर दौसा थाने में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने पत्नी को गिरफ्तार कर नाबालिग को निरुद्ध किया।
4 साल के मासूम को भी नहीं बख्शा :
कोटपूतली-बहरोड़ जिले के बास दयाल थाना क्षेत्र में भी रिश्तों को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई। पुलिस के अनुसार आरोपी हंसराज ने अपनी दूसरी पत्नी के चार वर्षीय बेटे आयन की हत्या कर दी और शव को श्मशान घाट के पास दफना दिया। मामले में आरोपी को गिरफ्तार किया गया।
संवाद, विश्वास जरूरी :
तीनों घटनाएं सवाल छोड़ती हैं कि जब घर ही रिश्तों की पहली पाठशाला और सबसे सुरक्षित जगह है तो वहां शक, गुस्सा और विवाद मासूम जिंदगियों पर क्यों भारी पड़ रहे हैं। रिश्तों को बचाने के लिए संवाद, विश्वास और समय रहते विवादों का समाधान जरूरी है, ताकि परिवार टूटने से पहले रिश्तों में फिर से अपनापन लौट सके।

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