आवासन मंडल अपने दायित्वों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध : राज्य के अफोर्डेबल हाउसिंग सेक्टर में मंडल ने दिया योगदान, शर्मा ने कहा –विभिन्न आय वर्गों के लिए गुणवत्तापूर्ण आवास कर रहे विकसित
गों के सपनों का घर बनाना है
एक ऑटोनोमस बॉडी होने के नाते हम चाहते हैं कि लोगों का हम पर विश्वास बना रहे। हमारा उद्देश्य सिर्फ मकान बनाना नहीं, बल्कि लोगों के सपनों का घर बनाना है।
जयपुर। राजस्थान आवासन मंडल आयुक्त डॉ. रश्मि शर्मा ने कहा कि आवास मंडल एक ऑटोनोमस संस्थान है और विगत वर्षों में अभूतपूर्व कार्य किए हैं और अपने दायित्वों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। नई दिल्ली में नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (नारेडको) की ओर से आयोजित राष्ट्रीय अर्बन रियल एस्टेट कॉन्क्लेव में डॉ. शर्मा ने कहा कि राज्य के अफोर्डेबल हाउसिंग सेक्टर में मंडल ने उल्लेखनीय योगदान दिया है। हम न केवल विभिन्न आय वर्गों के लिए गुणवत्तापूर्ण आवास विकसित कर रहे हैं, बल्कि उन्हें समयबद्ध तरीके से लोगों तक पहुंचाने के लिए भी निरंतर प्रयासरत हैं। उन्होंने कहा कि हमने नए रिक्रूट्स के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए हैं और मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने भी स्किलिंग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। क्वालिटी चेक्स हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और हमें इस पर गर्व है। हमने अपने पेमेंट सिस्टम को भी क्वालिटी से लिंक किया है, जिससे उच्च मानकों को सुनिश्चित किया जा सके। एक ऑटोनोमस बॉडी होने के नाते हम चाहते हैं कि लोगों का हम पर विश्वास बना रहे। हमारा उद्देश्य सिर्फ मकान बनाना नहीं, बल्कि लोगों के सपनों का घर बनाना है।
योजनाओं को व्यापक सराहना मिली
कार्यक्रम में राजस्थान सरकार की अफोर्डेबल हाउसिंग, गुणवत्ता सुधार एवं स्किल विकास योजनाओं को व्यापक सराहना मिली। कॉन्क्लेव में मंडल आयुक्त डॉ. शर्मा ने आवास निर्माण में गुणवत्ता, समयबद्ध डिलीवरी और श्रमिक प्रशिक्षण को प्राथमिकता बताते हुए बोर्ड की प्रमुख पहलों को रेखांकित किया। इस अवसर पर सतत विकास और ट्रांजिट ओरियंटिड डवलपमेंट पर जयपुर विकास प्राधिकरण सचिव निशांत जैन ने शहरी विकास में ट्रांजिट और कॉरिडोर आधारित एप्रोच पर प्रस्तुतिकरण दिया।
इंडस्ट्री सपोर्ट पॉलिसी की जरूरत
नारेडको के प्रेसिडेंट प्रवीण जैन ने बताया कि रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन सेक्टर को ऐसी पॉलिसी की जरूरत है जो इंडस्ट्री को सपोर्ट करें, ताकि अगले कुछ सालों में नेशनल जीडीपी में इसका कंट्रीब्यूशन दोगुना हो जाए और भारत 2047 तक अपनी मनचाही मंजिल विकसित भारत तक पहुंच सके।

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