बजट 2026-27: भारतीय उद्योग व्यापार मण्डल- 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी के लिए आयकर में सुधार और जीएसटी एमनेस्टी स्कीम जरूरी
व्यापारियों की उम्मीदें बढ़ गई
भारतीय उद्योग व्यापार मण्डल (बीयूवीएम) ने आगामी बजट 2026-27 के लिए सरकार को सुधारों के सुझाव भेजे। प्रमुख मांगों में जीएसटी में एमनेस्टी स्कीम, पेनल्टी घटाने, आयकर स्लैब में बदलाव, होम लोन पर ब्याज छूट बढ़ाने और पार्टनरशिप फर्मों पर टैक्स कम करने की सिफारिश की गई। बीयूवीएम का मानना है कि इससे व्यापार में आसानी और राजस्व में वृद्धि होगी।
जयपुर। केन्द्र सरकार द्वारा आगामी एक फरवरी को पेश किए जाने वाले आम बजट 2026-27 को लेकर व्यापारियों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। भारतीय उद्योग व्यापार मण्डल (बीयूवीएम) ने भारत सरकार को सुझाव भेजते हुए मांग की है कि देश को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए कर प्रणाली का और अधिक सरलीकरण आवश्यक है।
बीयूवीएम के शास्त्री नगर स्थित कार्यालय में आयोजित बजट परिचर्चा में संगठन के पदाधिकारियों ने जीएसटी अनुपालना में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों और आयकर स्लैब में बदलाव पर विस्तार से चर्चा की।
जीएसटी में एमनेस्टी स्कीम और प्रक्रियाओं का हो सरलीकरण :
भारतीय उद्योग व्यापार मण्डल के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता ने जीएसटी में सुधारों की वकालत करते हुए कहा कि सरकार ने जीएसटी स्लैब को दो श्रेणियों में समेटकर सराहनीय कार्य किया है, लेकिन अभी भी अनुपालना की राह में कई रोड़े हैं। उन्होंने प्रमुख मांगें रखीं :
ब्याज और पेनल्टी : पुराने वर्षों के लंबित मामलों के लिए तत्काल 'एमनेस्टी स्कीम' लाई जाए। ब्याज दर को 18% से घटाकर 6% किया जाए और पेनल्टी केवल गंभीर धोखाधड़ी के मामलों में ही लगे।
ITC और ई-वे बिल : GSTR-2B आधारित ITC रोकने की समस्या का स्थायी समाधान हो और ई-वे बिल की सीमा को बढ़ाकर 5 लाख रुपये किया जाए।
राहत : एक लाख रुपए तक की वार्षिक टैक्स डिमांड को 'राइट-ऑफ' किया जाए और ई-इनवॉइस में सुधार के लिए एक माह का समय मिले।
आयकर सुधार : मध्यम वर्ग और व्यापारियों को मिले राहत
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सुझाव दिया कि देश की आर्थिक गति तेज करने के लिए आयकर कानून में निम्नलिखित बदलाव वांछनीय हैं :
टैक्स स्लैब : 30 प्रतिशत की उच्चतम टैक्स स्लैब अब 36 से 40 लाख रुपये की आय वाले व्यक्तियों पर ही लागू की जानी चाहिए।
होम लोन : गृह ऋण (धारा 24बी) के तहत मिलने वाली ब्याज छूट को 2 लाख से बढ़ाकर 4 लाख रुपये किया जाए।
स्टैंडर्ड डिडक्शन : नौकरीपेशा वर्ग के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा को महंगाई के अनुरूप 1 लाख रुपये से ऊपर बढ़ाया जाए।
स्वास्थ्य बीमा : सेक्शन-डी (Health Insurance) की सीमा को बढ़ाकर 1.25 लाख रुपये किया जाए।
पार्टनरशिप फर्म : बिजनेस रिफॉर्म्स के तहत पार्टनरशिप फर्म्स पर लगने वाले टैक्स को कॉर्पोरेट टैक्स की तर्ज पर घटाकर 25 प्रतिशत किया जाए।
परिचर्चा में शामिल रहे प्रमुख पदाधिकारी :
इस बैठक में बीयूवीएम के उपाध्यक्ष मनोज मुरारका, राष्ट्रीय मंत्री रमेशचन्द कूलवाल, कार्यकारी अध्यक्ष सुरेश सैनी, संरक्षक प्रेमप्रकाश गुप्ता, कार्यकारिणी सदस्य किशोर नाजवानी, कैलाश चन्द कायथवाल और संजय कूलवाल सहित कई प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहे। संगठन का मानना है कि इन सुधारों से न केवल व्यापार करने में आसानी होगी (Ease of Doing Business), बल्कि देश के राजस्व में भी गुणात्मक वृद्धि होगी।

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