जमीन की उलझन में अटके बस स्टैंड : 30 करोड़ की योजना, 30 नए टर्मिनल ; कई जगह निर्माण अधर में
भूमि उपलब्ध नहीं हो पाने से योजनाएं अधर में लटकी
राज्य सरकार की वर्ष 2025-26 की परिवर्तित बजट घोषणा में 30 करोड़ रुपए की लागत से 30 नए बस स्टैंड बनाने की महत्वाकांक्षी योजना फिलहाल जमीन आवंटन की पेचीदगियों में उलझती नजर आ रही है।
जयपुर। राज्य सरकार की वर्ष 2025-26 की परिवर्तित बजट घोषणा में 30 करोड़ रुपए की लागत से 30 नए बस स्टैंड बनाने की महत्वाकांक्षी योजना फिलहाल जमीन आवंटन की पेचीदगियों में उलझती नजर आ रही है। रोडवेज प्रशासन ने लगभग दो दर्जन स्थानों पर बस स्टैंड निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी है, लेकिन कई कस्बों और शहरों में अब तक भूमि उपलब्ध नहीं हो पाने से योजनाएं अधर में लटकी हुई हैं। बजट घोषणा के अनुसार प्रत्येक बस स्टैंड का निर्माण लगभग 7 हजार वर्गमीटर भूमि पर किया जाना है। डीग, खींवसर, सांडेराव और आबूरोड में निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। इसके अलावा बयाना, अटरू, हनुमानगढ़, गंगापुरसिटी, कैलादेवी, पचपदरा, शाहपुरा, शिवगंज, कोटड़ा, झाड़ौल, बांदीकुई और लाडनूं में भी जल्द निर्माण कार्य शुरू किए जाने की तैयारी है। हालांकि सलूम्बर, सिवाना, थानागाजी, कोटपूतली और कोटा के दीगोद जैसे क्षेत्रों में अब तक रोडवेज प्रशासन को भूमि नहीं मिल सकी है। सलूम्बर में जमीन के अभाव में यह बजट घोषणा स्थानीय स्वायत्त शासन (LSG) विभाग को ट्रांसफर की जा रही है।
सिवाना में कैनाल एरिया डवलपमेंट से भूमि मिलना शेष है, जबकि थानागाजी में वन विभाग की मंजूरी अटकी हुई है। कोटपूतली में वर्कशॉप के लिए आवश्यक भूमि LSG स्तर पर नहीं मिल पाई है और दीगोद में जिला कलक्टर से भूमि आवंटन का इंतजार है। जयपुर के बगरू में नेशनल हाईवे पर जमीन नहीं मिलने से मामला और उलझ गया है। नगरपालिका द्वारा 3 किलोमीटर अंदर दी जा रही भूमि को रोडवेज प्रशासन उपयोगी नहीं मान रहा। इस मुद्दे पर हाल ही में डिप्टी सीएम डॉ. प्रेमचंद बैरवा की अध्यक्षता में बैठक भी हुई, लेकिन जमीन आवंटन अब भी विभिन्न स्तरों पर अटका हुआ है। वर्ष 2024-25 की परिवर्तित बजट घोषणाओं में भी देरी देखने को मिल रही है। कनवास (सांगोद), श्रीडूंगरगढ़, धोद (सीकर) और बूंदी में बस स्टैंड निर्माण के लिए अभी तक संबंधित विभागों से भूमि आवंटन नहीं हो पाया है। राज्य में कुल 60 शहरों और कस्बों में नए बस स्टैंड प्रस्तावित हैं, लेकिन 10 छोटे कस्बों में अब तक जमीन नहीं मिली है।
कुछ बड़े शहरों—उदयपुर, बीकानेर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, अजमेर, ब्यावर और भरतपुर—में पीपीपी मोड पर निर्माण के लिए ईओआई जारी की जा चुकी है। रोडवेज प्रशासन बजट घोषणाओं को धरातल पर उतारने के लिए लगातार प्रयासरत है, लेकिन जमीन की बाधा सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।जमीन की उलझन में अटके बस स्टैंड: 30 करोड़ की योजना, 30 नए टर्मिनल, कई जगह निर्माण अधर में जयपुर। राज्य सरकार की वर्ष 2025-26 की परिवर्तित बजट घोषणा में 30 करोड़ रुपए की लागत से 30 नए बस स्टैंड बनाने की महत्वाकांक्षी योजना फिलहाल जमीन आवंटन की पेचीदगियों में उलझती नजर आ रही है। रोडवेज प्रशासन ने लगभग दो दर्जन स्थानों पर बस स्टैंड निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी है, लेकिन कई कस्बों और शहरों में अब तक भूमि उपलब्ध नहीं हो पाने से योजनाएं अधर में लटकी हुई हैं। बजट घोषणा के अनुसार प्रत्येक बस स्टैंड का निर्माण लगभग 7 हजार वर्गमीटर भूमि पर किया जाना है। डीग, खींवसर, सांडेराव और आबूरोड में निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। इसके अलावा बयाना, अटरू, हनुमानगढ़, गंगापुरसिटी, कैलादेवी, पचपदरा, शाहपुरा, शिवगंज, कोटड़ा, झाड़ौल, बांदीकुई और लाडनूं में भी जल्द निर्माण कार्य शुरू किए जाने की तैयारी है। हालांकि सलूम्बर, सिवाना, थानागाजी, कोटपूतली और कोटा के दीगोद जैसे क्षेत्रों में अब तक रोडवेज प्रशासन को भूमि नहीं मिल सकी है। सलूम्बर में जमीन के अभाव में यह बजट घोषणा स्थानीय स्वायत्त शासन (LSG) विभाग को ट्रांसफर की जा रही है। सिवाना में कैनाल एरिया डवलपमेंट से भूमि मिलना शेष है, जबकि थानागाजी में वन विभाग की मंजूरी अटकी हुई है।
कोटपूतली में वर्कशॉप के लिए आवश्यक भूमि LSG स्तर पर नहीं मिल पाई है और दीगोद में जिला कलक्टर से भूमि आवंटन का इंतजार है। जयपुर के बगरू में नेशनल हाईवे पर जमीन नहीं मिलने से मामला और उलझ गया है। नगरपालिका द्वारा 3 किलोमीटर अंदर दी जा रही भूमि को रोडवेज प्रशासन उपयोगी नहीं मान रहा। इस मुद्दे पर हाल ही में डिप्टी सीएम डॉ. प्रेमचंद बैरवा की अध्यक्षता में बैठक भी हुई, लेकिन जमीन आवंटन अब भी विभिन्न स्तरों पर अटका हुआ है। वर्ष 2024-25 की परिवर्तित बजट घोषणाओं में भी देरी देखने को मिल रही है। कनवास (सांगोद), श्रीडूंगरगढ़, धोद (सीकर) और बूंदी में बस स्टैंड निर्माण के लिए अभी तक संबंधित विभागों से भूमि आवंटन नहीं हो पाया है। राज्य में कुल 60 शहरों और कस्बों में नए बस स्टैंड प्रस्तावित हैं, लेकिन 10 छोटे कस्बों में अब तक जमीन नहीं मिली है। कुछ बड़े शहरों—उदयपुर, बीकानेर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, अजमेर, ब्यावर और भरतपुर—में पीपीपी मोड पर निर्माण के लिए ईओआई जारी की जा चुकी है। रोडवेज प्रशासन बजट घोषणाओं को धरातल पर उतारने के लिए लगातार प्रयासरत है, लेकिन जमीन की बाधा सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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