जीएसटी नियमों में बदलाव से ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं पर संकट, बढ़ सकता है यात्रियों का किराया
ऐप आधारित ऑटो-कैब सेवाओं का उपयोग कम
जयपुर। एस्या सेंटर की नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि जीएसटी अधिनियम की धारा 9(5) के तहत सब्सक्रिप्शन आधारित राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म पर जीएसटी लागू करने से ड्राइवरों की आय घट सकती है, यात्रियों का किराया बढ़ सकता है और ऑफ-प्लेटफॉर्म टैक्सी सेवाओं को बढ़ावा मिल सकता है। रिपोर्ट 13 शहरों के 1,044 ड्राइवरों और 1,059 यात्रियों पर किए गए सर्वे पर आधारित है। एस्या डायरेक्टर मेघना बल ने बताया कि रिपोर्ट के अनुसार, 86 प्रतिशत ड्राइवर बुकिंग के लिए सब्सक्रिप्शन मॉडल का उपयोग करते हैं, जबकि 56 प्रतिशत का मानना है कि इससे उनकी कमाई अधिक स्थिर रहती है।
यदि प्रस्तावित जीएसटी लागू हुआ तो अधिकांश ड्राइवरों को आय घटने और बुकिंग कम होने की आशंका है। वहीं 68 प्रतिशत यात्रियों ने कहा कि किराया बढ़ने पर वे ऐप आधारित ऑटो-कैब सेवाओं का उपयोग कम कर देंगे। रिपोर्ट में सरकार से मांग की गई है कि धारा 9(5) केवल उन प्लेटफॉर्म पर लागू हो, जो किराया तय करने या भुगतान नियंत्रित करने में प्रत्यक्ष भूमिका निभाते हैं। साथ ही सुरक्षा, ड्राइवर सत्यापन और यात्रा निगरानी जैसी सेवाओं को टैक्स दायित्व का आधार नहीं माना जाना चाहिए।

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