निकाय चुनाव : दूसरी कुर्सी ने खोली कांग्रेस के फ्लोर मैनेजमेंट की पोल, पढ़ें पूरी खबर
बीकानेर प्रमुख उदाहरण बना
जयपुर। राजस्थान निकाय चुनाव में कांग्रेस ने प्रत्याशी चयन और चुनावी रणनीति के लिए सभी 200 विधानसभा क्षेत्रों में वरिष्ठ नेताओं को समन्वयक बनाया था। अब मेयर-सभापति के बाद डिप्टी मेयर, उपसभापति और उपाध्यक्ष के नतीजों ने पार्टी के स्थानीय फ्लोर मैनेजमेंट और पार्षदों को एकजुट रखने की क्षमता की तस्वीर सामने रखी है। बीकानेर इसका प्रमुख उदाहरण बना।
कांग्रेस के अनिल कल्ला ने मेयर का चुनाव 50-30 से जीता, जबकि पार्टी की मूल संख्या 42 पार्षदों की थी। इसके अगले ही दिन डिप्टी मेयर पद भाजपा के पंकज गहलोत के खाते में चला गया। राजनीतिज्ञों ने इसे क्रॉस वोटिंग से जोड़ा गया है।
यानी मेयर चुनाव में अतिरिक्त समर्थन जुटाने के बाद भी कांग्रेस दूसरे पद के चुनाव में वही समीकरण कायम नहीं रख सकी। दूसरी ओर टोंक में कांग्रेस ने सभापति के साथ उपसभापति पद भी अपने पास रखा।
यह अंतर बताता है कि अध्यक्ष पद जीतना और पूरे बोर्ड पर प्रभाव कायम रखना दो अलग राजनीतिक परीक्षाएं हैं। पीसीसी चीफ गोविन्द सिंह डोटासरा भी अपने क्षेत्र में आज काफी हद तक कामयाब नजर आए।

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