कांग्रेस वंदे मातरम् को बताती है अपनी विरासत : गीत को काटकर राष्ट्र की आत्मा के साथ किया धोखा, घनश्याम तिवाड़ी ने कहा- विभाजन और तुष्टिकरण की है इनकी विरासत

कांग्रेस की विरासत मानने को तैयार हूँ

कांग्रेस वंदे मातरम् को बताती है अपनी विरासत : गीत को काटकर राष्ट्र की आत्मा के साथ किया धोखा, घनश्याम तिवाड़ी ने कहा- विभाजन और तुष्टिकरण की है इनकी विरासत

सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि वंदे मातरम् गीत 7 नवंबर 1875 को बंग दर्शन पत्रिका में बंकिमचंद्र चटर्जी द्वारा प्रकाशित किया गया था।

जयपुर। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि वंदे मातरम् गीत भारतीय राष्ट्रभावना की आत्मा है। कांग्रेस वंदे मातरम् को अपनी विरासत बता रही है, जबकि कांग्रेस की विरासत भारत विभाजन और तुष्टिकरण की है। मुसलमानों को तुष्ट करने के लिए वंदे मातरम् गीत को काटा गया और संविधान की आत्मा में सुई चुभो दी गई। तिवाड़ी ने कांग्रेस को खुली चुनौती देते हुए कहा कि मैं कांग्रेस पार्टी को खुली चुनौती देता हूँ कि यदि वह यह समर्थन करे कि वंदे मातरम् गीत पूरा गाया जाना चाहिए, तो मैं इसे कांग्रेस की विरासत मानने को तैयार हूँ।

सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि वंदे मातरम् गीत 7 नवंबर 1875 को बंग दर्शन पत्रिका में बंकिमचंद्र चटर्जी द्वारा प्रकाशित किया गया था। 1896 में रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने कोलकाता में इसे पहली बार गाया। 1905 में बंग-भंग आंदोलन के दौरान यह गीत राष्ट्रीय आंदोलन की आवाज बन गया था। वहीं  1937 में मौलाना मोहम्मद अली और शौकत अली ने कांग्रेस अधिवेशन में वंदे मातरम् गीत का विरोध मुखर किया। गीत गाने वाले वक्ता को बीच में रोकते हुए उन्होंने इस गीत का बहिष्कार किया। इनता ही नहीं, कांग्रेस के नेताओं ने इस गीत को धर्म से जोड़ते हुए काटने का घिनौना कार्य किया। कांग्रेस नेताओं ने इस गीत का इसलिए विरोध किया क्योंकि इसमें मां दुर्गा, कमला और सरस्वती के नाम हैं। इसे धर्म से जोड़ते हुए गीत के कई अंशों तक को हटा दिया। जबकि देश की स्वतंत्रता की लड़ाई में कई मुस्लिम क्रांतिकारियों ने भी इस गीत का गायन किया था। 

सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि कांग्रेस ने 1914 में मुस्लिम लीग से समझौता कर भारत विभाजन की नींव रखी और 1937 में वंदे मातरम गीत को काटकर राष्ट्र की आत्मा से धोखा किया। कांग्रेस ने न केवल बंकिमचंद्र चटर्जी और रवीन्द्रनाथ टैगोर बल्कि बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर की आत्मा को भी ठेस पहुंचाई है। 1976 में कांग्रेस ने 42वें संविधान संशोधन के माध्यम से प्रस्तावना में परिवर्तन कर अपनी राजनीतिक विचारधारा थोपने का प्रयास किया, जबकि भारतीय जनता पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की राष्ट्रीय एकता और अखंडता को सशक्त बनाने के कार्य में जुटी हुई है। राष्ट्र के लिए वंदे मातरम् गीत भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना जन गण मन..। भाजपा राष्ट्र की आत्मा को पुनः जागृत करने और एकात्मता की भावना को मजबूत करने के लिए कार्य कर रही है।

Tags: Congress

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