डॉ. हेतु भारद्वाज को मिला “मान बहादुर सिंह लहक सम्मान–2025” साहित्य, समाज और मूल्यों पर हुई सार्थक चर्चा

ग्रामीण जीवन की भूमिका को रेखांकित किया। 

डॉ. हेतु भारद्वाज को मिला “मान बहादुर सिंह लहक सम्मान–2025” साहित्य, समाज और मूल्यों पर हुई सार्थक चर्चा

वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. हेतु भारद्वाज को राजस्थान प्रौढ़ शिक्षण समिति के सभागार में “मान बहादुर सिंह लहक सम्मान–2025” से सम्मानित किया गया। इसी अवसर पर डॉ. कर्ण सिंह चौहान के संपादन में लहक पत्रिका का “हेतु भारद्वाज विशेषांक” भी लोकार्पित हुआ। डॉ. भारद्वाज ने ग्रामीण जीवन और साहित्य की सामाजिक भूमिका पर प्रकाश डाला।

जयपुर। राजस्थान प्रौढ़ शिक्षण समिति के सभागार में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. हेतु भारद्वाज को प्रतिष्ठित “मान बहादुर सिंह लहक सम्मान–2025” से अलंकृत किया गया। इसी अवसर पर वरिष्ठ आलोचक डॉ. कर्ण सिंह चौहान के संपादन में प्रकाशित लहक पत्रिका के “हेतु भारद्वाज विशेषांक” का लोकार्पण भी किया गया।

सम्मान स्वीकार करते हुए डॉ. भारद्वाज ने अपनी सृजन-यात्रा में ग्रामीण जीवन की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आज की बदलती परिस्थितियों में गाँव की कृषि संस्कृति अपेक्षित दिशा में प्रगति नहीं कर पा रही है। साथ ही साहित्य जगत में पुरस्कारों की प्रतिस्पर्धा मूल उद्देश्य को प्रभावित कर रही है, जबकि रचना का ध्येय मनुष्यता और समाज से संवाद होना चाहिए।

मुख्य अतिथि डॉ. कर्ण सिंह चौहान ने हिंदी आलोचना की जटिल होती भाषा और विदेशी सिद्धांतों पर बढ़ती निर्भरता पर सवाल उठाए। उनके अनुसार आलोचना सरल, सहज और जीवनानुभव पर आधारित होनी चाहिए तथा मार्क्सवाद जैसे मूलभूत दृष्टिकोण नए शब्दाडंबरों के बीच कमजोर पड़ते जा रहे हैं।

वरिष्ठ आलोचक राजाराम भादू ने कहा कि डॉ. भारद्वाज जनवादी मूल्यों, पारदर्शिता और युवाओं से निरंतर संवाद के कारण विशिष्ट पहचान रखते हैं। वरिष्ठ कथाकार चंद्र किशोर जायसवाल ने साहित्य में राजनीतिक प्रभावशीलता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लेखक का लक्ष्य सदैव समाज के हित में लेखन होना चाहिए।

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अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. दुर्गा प्रसाद अग्रवाल ने नब्बे वर्ष की उम्र में भी डॉ. भारद्वाज की सक्रियता को प्रेरणादायी बताया और लहक सम्मान को साहित्यिक निष्ठा का दर्पण कहा। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. अजय अनुरागी ने किया तथा समिति अध्यक्ष राजेंद्र बोड़ा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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