नई पीढ़ी को निरोगी बनाने की कवायद : पैदा होते ही नवजात की स्क्रीनिंग, चार माह में 1508 जन्मजात रोगी मिले बच्चे
2,38,455 बच्चों की हुई जांच
जयपुर। राजस्थान में नई पीढ़ी को पूर्णत: स्वस्थ्य बनाने की कवायद बीते चार माह पहले शुरू की गई थी। इस दौरान प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में पैदा होने वाले हर बच्चें की अस्पताल में मेडिकल स्क्रीनिंग की जा रही है। अस्पतालों में लगी डॉक्टरों की टीम ने इस समयावधि में अब तक नए जन्में 2,38,455 नवजात में से 1508 बच्चों को जन्मजात बीमारी से पीड़ित माना हैं। राजस्थान में जिलेवार स्क्रीनिंग में अलवर में सबसे ज्यादा स्वस्थ्य बच्चे जन्में हैं। प्रतिशत के आधार पर देखें तो यहां 23,351 बच्चों में से 28 ही रोग पीड़ित मिले। जबकि बांसवाड़ा में सर्वाधिक 116 बच्चों में से 35 बच्चे रोग के शिकार मिले हैं। इनमें कोई ना कोई अपूर्णता मिली है। चिह्नित सभी जन्मजात रोगी बच्चों को बीमारी के अनुरूप बडे अस्पतालों में भेजकर इनका इलाज शुरू भी करा दिया गया है ताकि बड़े होने पर निरोगी जीवन जी सकें।
सालाना 9 हजार बच्चे बीमारी के शिकार :
प्रदेश में सालाना करीब 16 लाख नए बच्चों का जन्म होता है। 4 माह के आंकड़ों के अनुसार देखें तो करीब 0.63 फीसदी बच्चे जन्मजात बीमारी से पीड़ित मिलना अनुमानित हैं। ऐसे में सालाना करीब 9 हजार बच्चें ऐसे जन्मतें हैं जो बीमार होते हैं। बच्चें छोटे अस्पताल में बीमारी के शिकार मिलते हैं तो अब इन्हें जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में शिशु रोग विशेषज्ञों के पास इलाज को रैफर किया जा रहा है।
नवजात में अधिकांश को होती हैं ये बीमारियां :
दिल में छेद व इसकी नसों या वाल्व में खराबी, मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी रोग जैसे स्पाइना बिफिडा, मेनिंगोसील या मायलोमेनिंगोसील, एन्सेफेलोसील, सिर का आकार छोटा होना, मस्तिष्क में पानी भरना, हाथ-पैर और शरीर बनावट विकृतियां जैसे क्लब फुट यानी पैर टेढ़ा होना, अतिरिक्त उंगली या उंगलियों का आपस में जुड़ा होना, होंठ या तालू का कटाव जैसे क्लेफ्ट लिप, थायरॉयड-हार्मोन रोग जैसे हाइपोथायरॉयडिज्म, आनुवंशिक बीमारियां जैसे थैलेसीमिया इत्यादि।
बीमारियों के प्रमुख कारण व बचाव :
गर्भावस्था के दौरान फोलिक एसिड की कमी, मां में डायबिटीज, मां में खून की कमी, कुपोषण और अधिक उम्र में गर्भधारण। बचाव के लिए गर्भधारण के शुरूआत में फोलिक एसिड लें, नियमित प्रसवपूर्व जांच कराएं, समय समय पर अल्ट्रासाउंड जांच हो, मां की शुगर और हीमोग्लोबिन की जांच।

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